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ZafarAli Memon
taajmahal feeka lagta tha
taajmahal feeka lagta tha | ताजमहल फीका लगता था
- ZafarAli Memon
ताजमहल
फीका
लगता
था
जब
तक
तू
उसके
आगे
थी
- ZafarAli Memon
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दिल
ऐसा
कि
सीधे
किए
जूते
भी
बड़ों
के
ज़िद
इतनी
कि
ख़ुद
ताज
उठा
कर
नहीं
पहना
Munawwar Rana
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ये
क़त्ल-ए-आम
और
बे-इज़्न
क़त्ल-ए-आम
क्या
कहिए
ये
बिस्मिल
कैसे
बिस्मिल
हैं
जिन्हें
क़ातिल
नहीं
मिलता
वहाँ
कितनों
को
तख़्त
ओ
ताज
का
अरमाँ
है
क्या
कहिए
जहाँ
साइल
को
अक्सर
कासा-ए-साइल
नहीं
मिलता
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Asrar Ul Haq Majaz
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सच
की
डगर
पे
जब
भी
रक्खे
क़दम
किसी
ने
पहले
तो
देखी
ग़ुर्बत
फिर
तख़्त-ओ-ताज
देखा
Amaan Pathan
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उलझ
करके
तेरी
ज़ुल्फ़ों
में
यूँँ
आबाद
हो
जाऊँ
कि
जैसे
लखनऊ
का
मैं
अमीनाबाद
हो
जाऊँ
मैं
यमुना
की
तरह
तन्हा
निहारूँ
ताज
को
कब
तक
कोई
गंगा
मिले
तो
मैं
इलाहाबाद
हो
जाऊँ
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Ashraf Jahangeer
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एक
कमी
थी
ताज-महल
में
मैंने
तिरी
तस्वीर
लगा
दी
Kaif Bhopali
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बनाओ
ताजमहल
के
ब-जाए
ताश
महल
तमाम
उम्र
मुहब्बत
करो
गिराओ
बनाओ
Charagh Sharma
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वो
चाहता
था
कि
कासा
ख़रीद
ले
मेरा
मैं
उस
के
ताज
की
क़ीमत
लगा
के
लौट
आया
Rahat Indori
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हुस्न
ऐसा
है
कि
देखो
तो
लगे
ताज-महल
इस
पे
वो
शख़्स
सँवरता
भी
ग़ज़ल
जैसा
है
Manazir Ashiq Harganvi
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दिल्ली
में
आज
भीक
भी
मिलती
नहीं
उन्हें
था
कल
तलक
दिमाग़
जिन्हें
ताज-ओ-तख़्त
का
Meer Taqi Meer
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सर
पटक
के
रो
रहा
हूँ
मैं
गुज़िश्ता
रात
से
छोड़
जाने
को
कहा
था
उसने
मुझ
सेे
ख़्वाब
में
ZafarAli Memon
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तुम
हो
मेरा
प्यारा
गुड्डा
दिल
में
रहने
वाला
गुड्डा
तुम
लट्टू
हो
मेरे
ऊपर
मैं
पागल
मतवाला
गुड्डा
तुम
जैसे
चंदा
पूनम
के
मैं
चमकीला
तारा
गुड्डा
बाज़ी
जीतूँ
मैं
हर
इक
से
तुम
पर
आ
के
हारा
गुड्डा
जन्नत
में
जब
साथी
देना
दे
देना
दोबारा
गुड्डा
तुम
कहते
हो
मुझ-को
'ज़फ़्फू'
मैं
कहता
हूँ
प्यारा
गुड्डा
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ZafarAli Memon
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जन्नत
की
ख़्वाहिश
तो
सब
को
है
लेकिन
अव्वल
तो
मरने
से
ही
डर
लगता
है
ZafarAli Memon
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मिरी
कश्ती
भरे
पानी
में
भी
अब
धूल
खाती
है
वो
सबको
याद
करती
है
मुझे
ही
भूल
जाती
है
ZafarAli Memon
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आसाँ
है
मिट्टी
से
मिट्टी
पे
मिट्टी
लिखना
मुश्किल
है
इक-तरफ़ा
चाहत
में
चिट्ठी
लिखना
ZafarAli Memon
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