aarzi hai KHushi aur gham sarpar | आरज़ी है ख़ुशी और ग़म मुस्तक़िल

  - Zaan Farzaan
आरज़ीहैख़ुशीऔरग़ममुस्तक़िल
ज़िंदगीकारहायेसितममुस्तक़िल
चाहतोउसकोभीख़ूबहोगीमेरी
एकअरसेसेहैयेभरममुस्तक़िल
दिलमेंइकख़ामुशीचीख़तीहैसदा
बे-सबबकाटतीहैउधममुस्तक़िल
तबभीथेग़ममगरथेनहींइसक़दर
अबतोरहतीहैयेचश्म-ए-नममुस्तक़िल
दिक्कतेंहरक़दमथींमेरेसामने
परबढ़ातागयामैंक़दममुस्तक़िल
शुक्रियारबतेरायेक़लमदीमुझे
सचलिखेबिनडरेयेक़लममुस्तक़िल
आज़माइशतोअबमुस्तक़िलसहलूँमैं
बादइसकेअगरहोकरममुस्तक़िल
उसकोसच्चातुममानलेनाकभी
खारहाहोअगरवोक़सममुस्तक़िल
ख़त्मकैसेकरूँँतेरीयादोंकोमैं
लेरहीहैंजोमुझमेंजनममुस्तक़िल
क्याख़बरहोउसेभूकक्याहोतीहै
हालजिसकारहापुर-शिकममुस्तक़िल
इकसबासुब्हमेंज़ेहनकरतीहैवा
'ज़ान'जागाकरोसुब्ह-दममुस्तक़िल
  - Zaan Farzaan
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