jigar ka khoo bahaaya ja raha hai | जिगर का ख़ूॅं बहाएा जा रहा है

  - Yunus chishti
जिगरकाख़ूॅंबहाएाजारहाहै
ग़मोंमेंमुस्कुरायाजारहाहै
ख़ुदाकाडरसुनायाजारहाहै
हमेंकितनाडरायाजारहाहै
तुम्हारेहैंतुम्हारेहैंयेकहके
हमेंपागलबनायाजारहाहै
उधरफेरेकिसीकेहोरहेहैं
इधरमातममनायाजारहाहै
बग़ावतकररहेहैंचंदक़तरे
समुंदरबौखलायाजारहाहै
वफ़ाकेसिलसिलेमेंशे'रकहना
बड़ादुश्वारपायाजारहाहै
  - Yunus chishti
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