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Yogamber Agri
haar se jo bhi lad raha hogaa
haar se jo bhi lad raha hogaa | हार से जो भी लड़ रहा होगा
- Yogamber Agri
हार
से
जो
भी
लड़
रहा
होगा
ज़िंदगी
से
वही
भरा
होगा
रोटी
देखी
पड़ी
यूँँ
मुफ़लिस
ने
देख
के
भूख
से
मरा
होगा
ये
तमन्ना
सिटी
की
ले
डूबा
कैसे
अब
गाँव
भी
हरा
होगा
जीत
की
ख़ुशबू
है
उसी
में
जो
आत्मविश्वास
से
भरा
होगा
- Yogamber Agri
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तुम
भी
रोती
हुई
दिखाई
दो
मैंने
रोते
हुए
ये
चाहा
था
Vikas Rana
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लो
चाँद
हो
गया
नमू
माह-ए-ख़राम
का
ऐ
मोमिनों
लिबास-ए-सियाह
ज़ेब-ए-तन
करो
फ़र्श-ए-अज़ा
बिछा
के
अज़ाख़ाने
में
शजर
अब
सुब्ह-ओ-शाम
ज़िक्र-ए-ग़रीब-उल-वतन
करो
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Shajar Abbas
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मिलना
हमारा
कम
हुआ
फिर
बात
कम
हुई
क़िस्तों
में
मुझ
ग़रीब
की
ख़ैरात
कम
हुई
Bhawana Srivastava
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ख़िलाफ़-ए-शर्त-ए-अना
था
वो
ख़्वाब
में
भी
मिले
मैं
नींद
नींद
को
तरसा
मगर
नहीं
सोया
ख़िलाफ़-ए-मौसम-ए-दिल
था
कि
थम
गई
बारिश
ख़िलाफ़-ए-ग़ुर्बत-ए-ग़म
है
कि
मैं
नहीं
रोया
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Khalil Ur Rehman Qamar
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पराई
आग
पे
रोटी
नहीं
बनाऊँगा
मैं
भीग
जाऊँगा
छतरी
नहीं
बनाऊँगा
Tehzeeb Hafi
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तुझे
न
आएँगी
मुफ़्लिस
की
मुश्किलात
समझ
मैं
छोटे
लोगों
के
घर
का
बड़ा
हूॅं
बात
समझ
Umair Najmi
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धूप
पड़े
उस
पर
तो
तुम
बादल
बन
जाना
अब
वो
मिलने
आए
तो
उसको
घर
ठहराना।
तुमको
दूर
से
देखते
देखते
गुज़र
रही
है
मर
जाना
पर
किसी
गरीब
के
काम
न
आना।
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Tehzeeb Hafi
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जितने
मर्ज़ी
महँगे
पकवानों
को
खालो
तुम
घर
की
रोटी
तो
फिर
घर
की
रोटी
होती
है
Sarvjeet Singh
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हज़ारों
साल
नर्गिस
अपनी
बे-नूरी
पे
रोती
है
बड़ी
मुश्किल
से
होता
है
चमन
में
दीदा-वर
पैदा
Allama Iqbal
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ये
तेरे
ख़त
ये
तेरी
ख़ुशबू
ये
तेरे
ख़्वाब-ओ-ख़याल
मता-ए-जाँ
हैं
तेरे
कौल
और
क़सम
की
तरह
गुज़िश्ता
साल
मैंने
इन्हें
गिनकर
रक्खा
था
किसी
ग़रीब
की
जोड़ी
हुई
रक़म
की
तरह
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Jaun Elia
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है
तुझ
से
ये
सवाल
भी
हाँ
जीना
है
मुहाल
भी
मर्ज़ी
है
तेरी
आ
ना
आ
है
आस
इसही
साल
भी
सिम
तेरा
मेरे
पास
है
कर
लेना
मुझ
को
कॉल
भी
फल
गिरता
क्यूँँ
है
पेड़
से
न्यूटन
सा
मेरा
हाल
भी
ख़ुश
रहना
मेरे
बिन
सदा
रख
ख़ुद
का
तुम
ख़याल
भी
ऐ
आदमी
हो
ख़ुश
जरा
इस
पीड़ा
को
निकाल
भी
हो
हिंदी
जो
जनवरी
उर्दू
नया
हो
साल
भी
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Yogamber Agri
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हाथ
नीचे
करता
हूँ
मैं
तुम
अगर
कह
दो
हवा
से
कान
के
पीछे
से
ज़ुल्फ़ें
तेरे
चेहरे
पर
न
लाए
Yogamber Agri
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मैं
काला
टीका
तेरी
मुस्कान
पर
लगा
लूँ
देखा
है
मैंने
इस
पर
लड़ते
जहाँ
को
सारा
Yogamber Agri
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जो
भी
हम
को
भुला
अब
चुके
हैं
याद
वो
ख़ूब
हम
को
करेंगे
Yogamber Agri
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वो
हँसे
चुपके
हँस
जाने
पे
रोती
है
मुझ
सा
दीवाने
पे
इश्क़
उसको
नहीं
मुझ
से
अब
प्यार
है
उस
के
ये
गाने
पे
यूँँ
किसी
से
मैं
हारा
नहीं
हारा
ख़ुद
से
उसे
पाने
पे
मैं
तो
तेरा
हूँ
ही
क्या
मगर
मेरा
होना
तेरे
आने
पे
इतने
तो
हम
बुरे
हैं
ही
की
याद
आएँगे
मर
जाने
पे
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Yogamber Agri
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