दियों के नीचे उदास बैठे ज़िया की चाहत में आम चेहरे

  - YAWAR ALI
दियोंकेनीचेउदासबैठेज़ियाकीचाहतमेंआमचेहरे
नसीबपेअपनेरोरहेहैंग़मोंमेंलिपटेतमामचेहरे
कईदरख़्तोंपेफूलखिलतेहैंदौर-ए-बाद-ए-शबाबमेंभी
हमेशादिखतेनहींदुखीहीदुखोंमेंलिपटेतमामचेहरे
रहेगीहरदमबेरुख़ीहीढलेगीशबभीसहरभीहोगी
बहालहोजाएँगेत'अल्लुक़करेंगेजबएहतिरामचेहरे
क़रीबहोकरभीबारहारुख़कभीकोरहतेहैंअजनबीही
कभीबनालेतेहैंठिकानादिलोंकेअंदरअनामचेहरे
मुशायरोंकोतोख़ुदअदीबोंनेइकतमाशाबनादियाहै
कहाँयेगाने-बजानेवालेकहाँवोअहल-ए-कलामचेहरे
ख़बर-नवीसोंकेदलनहींहैंयेज़र-ख़रीदोंकीटोलियाँहैं
जिधरभीदेखोउधरझुकेहैंबदोंकेआगेग़ुलामचेहरे
सियाह-बख़्तीपेआजअपनीयूँँहीसहाफ़तरोरहीहै
हलालचेहरोंकोओढ़ेबैठेहैंमजलिसोंमेंहरामचेहरे
  - YAWAR ALI
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