bik ga.e mere khet mutthi bhar | बिक गए मेरे खेत मुट्ठी भर

  - YAWAR ALI
बिकगएमेरेखेतमुट्ठीभर
रहगईसिर्फ़रेतमुट्ठीभर
क़ाफ़िलालुटगयासबबउनके
लोगथेजोसचेतमुट्ठीभर
शहरकीभूकखागईधरती
हैंबचेसिर्फ़खेतमुट्ठीभर
जारहीहैफिसलतीहाथोंसे
ज़िंदगीक्याहैरेतमुट्ठीभर
वोजोनिकलेथेराह-ए-ईमाँपे
बिकगएघरसमेतमुट्ठीभर
बारिशोंमेंग़रीबफिररोए
गिरगएफिरनिकेतमुट्ठीभर
दूरबैठाहैहरकोईसचसे
हैंकहाँअबअचेतमुट्ठीभर
  - YAWAR ALI
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