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Karan Shukla
dukh men bhi jo KHushi se yahaañ khilte hain
dukh men bhi jo KHushi se yahaañ khilte hain | दुख में भी जो ख़ुशी से यहाँ खिलते हैं
- Karan Shukla
दुख
में
भी
जो
ख़ुशी
से
यहाँ
खिलते
हैं
सारे
ज़ख़्मों
को
आख़िर
तो
ये
सिलते
हैं
ये
रिवाज़
अच्छा
लगता
है
हमको
कहीं
हाथ
नइँ
दोस्तों
से
गले
मिलते
हैं
- Karan Shukla
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तुम्हें
ज़रूरत
क्या
कोई
त्योहारों
की
रंग
लगाकर
गले
लगाने
आ
जाओ
Divy Kamaldhwaj
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जैसे
कोई
रोता
है
गले
प्यार
से
लग
कर
कल
रात
मैं
रोया
तेरी
दीवार
से
लग
कर
Aziz Ejaaz
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गले
तो
लगना
है
उस
से
कहो
अभी
लग
जाए
यही
न
हो
मेरा
उस
के
बग़ैर
जी
लग
जाए
मैं
आ
रहा
हूँ
तेरे
पास
ये
न
हो
कि
कहीं
तेरा
मज़ाक़
हो
और
मेरी
ज़िंदगी
लग
जाए
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Tehzeeb Hafi
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ये
कब
कहती
हूँ
तुम
मेरे
गले
का
हार
हो
जाओ
वहीं
से
लौट
जाना
तुम
जहाँ
बेज़ार
हो
जाओ
Parveen Shakir
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दफ़्तर
तक
जाकर
के
वापस
लौटा
हूँ
गले
लगाना
भूल
गया
था
तुमको
मैं
Tanoj Dadhich
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वो
गले
से
लिपट
के
सोते
हैं
आज-कल
गर्मियाँ
हैं
जाड़ों
में
Muztar Khairabadi
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गले
सब
मिल
रहे
हैं
उस
सेे
हँसकर
हमारा
हक़
तो
मारा
जा
रहा
है
Pooja Bhatia
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पेड़
को
काटने
वाले
क्या
जाने
दुख
हम
गले
लग
नहीं
सकते
दीवार
से
Neeraj Neer
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वो
अक़्ल-मंद
कभी
जोश
में
नहीं
आता
गले
तो
लगता
है
आग़ोश
में
नहीं
आता
Farhat Ehsaas
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हर
मुलाक़ात
पे
सीने
से
लगाने
वाले
कितने
प्यारे
हैं
मुझे
छोड़
के
जाने
वाले
ज़िंदगी
भर
की
मोहब्बत
का
सिला
ले
डूबे
कैसे
नादाँ
थे
तिरे
जान
से
जाने
वाले
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Vipul Kumar
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जेब
अगर
जो
ख़ाली
है
तो
हर
रिश्ता
हावी
है
धोका
तो
देगी
इक
दिन
ये
साँसों
की
गाड़ी
है
हर
ग़लती
के
आगे
अब
तेरा
बस
इक
सारी
है
घर
जाते
डर
लगता
है
वो
मुझ
सेे
फिर
रूठी
है
टूट
गए
जो
हम
तो
क्या
पहली
पहली
बारी
है
हल्के
में
यूँँ
मत
लेना
अब
दुश्मन
की
पारी
है
बाहरस
राधे
राधे
मन
के
अंदर
पापी
है
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Karan Shukla
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काला
चेहरा
लगता
है
ग़म
का
साया
लगता
है
उस
सेे
यारी
रखने
में
अपना
पैसा
लगता
है
भूलें
तो
कैसे
भूलें
यार
ज़माना
लगता
है
अब
उसका
पीछा
करना
एक
तमाशा
लगता
है
उसके
हाथ
में
चाकू
भी
आख़िर
गुल
सा
लगता
है
फंदे
पर
चढ़ने
वालों
घर
को
धक्का
लगता
है
पहली
दफ़ा
में
हर
कोई
अक्सर
अच्छा
लगता
है
लड़की
वालों
से
पूछो
घर
क्यूँँ
सूना
लगता
है
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Karan Shukla
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अगर
तस्वीर
जो
तेरी
हटा
दूँगा
तो
अपने
आप
को
ही
फिर
सज़ा
दूँगा
नहीं
होना
इसे
लेकर
परेशाँ
तू
तिरे
इज़हार
का
वो
ख़त
जला
दूँगा
बिछड़ते
वक़्त
तुमको
दूर
तक
देखे
भला
सोचो
तुम्हें
कैसा
भुला
दूँगा
बिगाड़ा
है
उसी
इक
दोस्त
ने
मुझको
जो
कहता
था
तुझे
क़ाबिल
बना
दूँगा
उसे
भी
बद्दुआ
लगती
यहाँ
जिस
सेे
कहाँ
सबने
हो
तुझको
मैं
दु'आ
दूँगा
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Karan Shukla
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तुमपे
मरने
की
हद
है
कुछ
भी
करने
की
हद
है
कब
तक
झेले
तुझको
हम
अब
दिल
भरने
की
हद
है
उनकी
इज़्ज़त
रखने
को
चुप
भी
करने
की
हद
है
छिपकली
हो
या
जानाँ
कुछ
इनसे
डरने
की
हद
है
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Karan Shukla
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मेरा
साहिल
कोई
और
है
मुझे
हासिल
कोई
और
है
मुझे
अब
देखकर
रो
मत
तेरे
क़ाबिल
कोई
और
है
ये
तो
हालात
हैं
वरना
मिरी
मंज़िल
कोई
और
है
बहादुर
हैं
ये
रोते
लोग
यहाँ
बुज़दिल
कोई
और
है
जहाँ
तुम
थे
'करन'
देखो
वहाँ
दाख़िल
कोई
और
है
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Karan Shukla
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