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ALI ZUHRI
vo shaKHs ham se bichhda to lautaa nahin kabhi
vo shaKHs ham se bichhda to lautaa nahin kabhi | वो शख़्स हम से बिछड़ा तो लौटा नहीं कभी
- ALI ZUHRI
वो
शख़्स
हम
से
बिछड़ा
तो
लौटा
नहीं
कभी
लगता
था
आ
रहा
है
पर
आया
नहीं
कभी
ऐसा
हसीन
चेहरा
था
उस
शख़्स
का
कि
फिर
उस
सा
भी
दूसरा
कोई
भाया
नहीं
कभी
इक
दौर
था
वो
मिलता
था
जब
सुब्ह
शाम
को
अब
ख़्वाब
में
भी
मिलने
वो
आता
नहीं
कभी
- ALI ZUHRI
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देखने
के
लिए
सारा
आलम
भी
कम
चाहने
के
लिए
एक
चेहरा
बहुत
Asad Badayuni
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इक
गुल
के
मुरझाने
पर
क्या
गुलशन
में
कोहराम
मचा
इक
चेहरा
कुम्हला
जाने
से
कितने
दिल
नाशाद
हुए
Faiz Ahmad Faiz
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शदीद
गर्मी
में
कैसे
निकले
वो
फूल-चेहरा
सो
अपने
रस्ते
में
धूप
दीवार
हो
रही
है
Shakeel Jamali
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बरसों
बाद
दिखा
चहरा
तो
समझे
हम
कैसे
इक
तस्वीर
पुरानी
होती
है
Shriyansh Qaabiz
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तेरा
चेहरा
कितना
सुहाना
लगता
है
तेरे
आगे
चाँद
पुराना
लगता
है
Kaif Bhopali
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नश्शा-हा
शादाब-ए-रंग-ओ-साज़-हा
मस्त-ए-तरब
शीशा-ए-मय
सर्व-ए-सब्ज़-ए-जू-ए-बार-ए-नग़्मा
है
Mirza Ghalib
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यूँँ
देखते
रहना
उसे
अच्छा
नहीं
'मोहसिन'
वो
काँच
का
पैकर
है
तो
पत्थर
तिरी
आँखें
Mohsin Naqvi
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इतना
प्यारा
है
वो
चेहरा
कि
नज़र
पड़ते
ही
लोग
हाथों
की
लकीरों
की
तरफ़
देखते
हैं
Nadir Ariz
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डर
है
घर
में
कैसे
बोला
जाएगा
छोड़ो
जो
भी
होगा
देखा
जाएगा
मैं
बस
उसका
चेहरा
पढ़कर
जाऊँगा
मेरा
पेपर
सब
सेे
अच्छा
जाएगा
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Vishal Singh Tabish
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रोना
हो
आसान
हमारा
इतना
कर
नुक़्सान
हमारा
बात
नहीं
करनी
तो
मत
कर
चेहरा
तो
पहचान
हमारा
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Shariq Kaifi
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अपने
ख़्वाबों
में
जिसको
सजा
रक्खा
है
मैंने
दिल
की
मलिका
जो
बना
रक्खा
है
ALI ZUHRI
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मेरी
तमाम
ज़िंदगी
बर्बाद
कर
के
अब
मसरूफ़
होगी
ईद
कि
तय्यारियों
में
वो
ALI ZUHRI
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यह
दीवारें
भी
हँसने
लगती
हैं
उफ़
जब
तुम
ग़ुस्से
में
हकलाती
हो
ALI ZUHRI
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जो
तुमको
अपनी
नज़्म
सुनाया
करता
हूँ
मैं
बस
इस
दिल
को
ही
बहकाया
करता
हूँ
यारों
रातों
को
नींद
किसे
अब
आती
है
बिस्तर
पे
अपना
जिस्म
गिराया
करता
हूँ
अब
तुम
ही
देखो
ये
सारी
पिक्चर
विक्चर
मैं
तो
बस
तुम
से
मिलने
आया
करता
हूँ
मुझको
जब
उस
पर्वत
से
परियाँ
दिखती
हैं
तब
ही
तो
उस
पे
होके
आया
करता
हूँ
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ALI ZUHRI
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तुम
जो
दीवानों
को
आवारा
बता
देते
हो
तुम
तो
मेयार
मोहब्बत
का
गिरा
देते
हो
तुम
को
आता
है
नए
लोगों
में
घुलना
मिलना
बाद
हिजरत
के
नया
शहर
बसा
देते
हो
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ALI ZUHRI
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