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Vivek Vistar
yahaañ hamne sambhaala hosh hai jabse
yahaañ hamne sambhaala hosh hai jabse | यहाँ हमने सँभाला होश है जबसे
- Vivek Vistar
यहाँ
हमने
सँभाला
होश
है
जबसे
तभी
से
हो
रहीं
रफ़्तार
की
बातें
- Vivek Vistar
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सोच
समझ
कर
देख
लिया
है
क्या
बोलूँ
तुझ
को
तो
हर
बात
बुरी
लग
जाती
है
Sohil Barelvi
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तुझे
न
आएँगी
मुफ़्लिस
की
मुश्किलात
समझ
मैं
छोटे
लोगों
के
घर
का
बड़ा
हूॅं
बात
समझ
Umair Najmi
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वक़्त,
वफ़ा,
हक़,
आँसू,
शिकवे
जाने
क्या
क्या
माँग
रहे
थे
एक
सहूलत
के
रिश्ते
से
हम
ही
ज़्यादा
माँग
रहे
थे
उसकी
आँखें
उसकी
बातें
उसके
लब
वो
चेहरा
उसका
हम
उसकी
हर
एक
अदास
अपना
हिस्सा
माँग
रहे
थे
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Shikha Pachouly
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दौलतें
मुद्दा
बनीं
या
ज़ात
आड़े
आ
गई
इश्क़
में
कोई
न
कोई
बात
आड़े
आ
गई
Baghi Vikas
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हर
किसी
से
ही
मुहब्बत
माँगता
है
दिल
तो
अब
सब
सेे
अक़ीदत
माँगता
है
सीख
आया
है
सलीक़ा
ग़ुफ़्तगू
का
मुझ
सेे
मेरा
दोस्त
इज़्ज़त
माँगता
है
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ये
अलग
बात
कि
ख़ामोश
खड़े
रहते
हैं
फिर
भी
जो
लोग
बड़े
हैं,
वो
बड़े
रहते
हैं
Rahat Indori
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तुम
मुख़ातिब
भी
हो
क़रीब
भी
हो
तुम
को
देखें
कि
तुम
से
बात
करें
Firaq Gorakhpuri
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तिरे
बग़ैर
भी
हम
जी
रहे
हैं
और
ख़ुश
हैं
ये
बात
कम
तो
नहीं
है
तुझे
जलाने
को
Imran Aami
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बात
ऐसी
भी
भला
आप
में
क्या
रक्खी
है
इक
दिवाने
ने
ज़मीं
सर
पे
उठा
रक्खी
है
इत्तिफ़ाक़न
कहीं
मिल
जाए
तो
कहना
उस
सेे
तेरे
शाइर
ने
बड़ी
धूम
मचा
रक्खी
है
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Ismail Raaz
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बात
उल्टी
वो
समझते
हैं
जो
कुछ
कहता
हूँ
अब
के
पूछा
तो
ये
कह
दूँगा
कि
हाल
अच्छा
है
Jaleel Manikpuri
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वो
कभी
भगवा
कभी
बुर्क़ा
हिजाबों
पर
लड़े
इस
तरह
से
मुल्क
हम
आगे
बढ़ा
सकते
नहीं
Vivek Vistar
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आँखों
में
हमने
भी
कुछ
सपने
पाले
हैं
लेकिन
उन
सपनों
पर
पलकों
के
ताले
हैं
अपने
रथ
का
ख़ुद
ही
सारथी
बनना
होगा
इस
युग
में
अब
कृष्ण
नहीं
आने
वाले
हैं
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Vivek Vistar
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लैला
के
ख़्वाब
मरे
हैं
महलों
में
लेकिन
मजनूँ
को
सड़कों
पर
पत्थर
खाना
होगा
Vivek Vistar
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जहाँ
मशहूर
था
रिश्ता
हमारा
तुम्हारे
बाद
क्या
बचता
हमारा
किसी
की
ज़ुल्फ़
से
यूँँ
ही
उलझ
कर
बहुत
खिलने
लगा
कुर्ता
हमारा
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Vivek Vistar
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पिछला
शे'र
मुक़र्रर
कर
दो
अगला
मिसरा
याद
नहीं
है
Vivek Vistar
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