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Vivek Vistar
hamaare saath sabka saath doge ab
hamaare saath sabka saath doge ab | हमारे साथ सबका साथ दोगे अब
- Vivek Vistar
हमारे
साथ
सबका
साथ
दोगे
अब
तुम्हीं
करने
लगे
सरकार
की
बातें
- Vivek Vistar
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इस
दौर-ए-सियासत
का
इतना
सा
फ़साना
है
बस्ती
भी
जलानी
है
मातम
भी
मनाना
है
Unknown
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सियासत
के
चेहरे
पे
रौनक़
नहीं
ये
औरत
हमेशा
की
बीमार
है
Shakeel Jamali
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ले
लो
बोसा
अपना
वापस
किस
लिए
तकरार
की
क्या
कोई
जागीर
हम
ने
छीन
ली
सरकार
की
Akbar Merathi
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दीवार
उठाने
की
तिजारत
नहीं
आई
दिल्ली
में
रहे
और
सियासत
नहीं
आई
बिकने
को
तो
दिल
बिक
गया
बाज़ार
में
लेकिन
जो
आप
बताते
थे
वो
क़ीमत
नहीं
आई
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Obaid Azam Azmi
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बख़्शी
हैं
हम
को
इश्क़
ने
वो
जुरअतें
'मजाज़'
डरते
नहीं
सियासत-ए-अहल-ए-जहाँ
से
हम
Asrar Ul Haq Majaz
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मुहब्बत
में
हमने
सियासत
न
की
तभी
इश्क़
में
कोई
बरकत
न
की
उसे
मानता
था
मैं
अपना
ख़ुदा
कभी
उसकी
लेकिन
इबादत
न
की
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RAJAT AWASTHI
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इन
से
उम्मीद
न
रख
हैं
ये
सियासत
वाले
ये
किसी
से
भी
मोहब्बत
नहीं
करने
वाले
Nadim Nadeem
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वो
हिंदू,
मैं
मुस्लिम,
ये
सिक्ख,
वो
ईसाई
यार
ये
सब
सियासत
है
चलो
इश्क़
करें
Rahat Indori
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हमारे
ख़ौफ़
से
बाज़ार
उछलते
हैं
जहाँ
भर
में
सिसकने
से
हमारे
कौन
सी
सरकार
गिरती
है
Nomaan Shauque
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दो
मुल्कों
के
सियासी
खेल
में
जाने
यहाँ
पर
कितनों
के
घर
उजड़े
हैं
मौला
वही
हर
सुब्ह
मंज़र
देखना
पड़ता
हज़ारों
लोग
यूँँ
ही
मरते
हैं
मौला
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Harsh saxena
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उमड़
कर
रह
गया
बावजूद
इसके
आँख
का
वो
समुंदर
बहा
ही
नहीं
Vivek Vistar
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उसकी
आँखों
में
खोया
है
सब
कुछ
अपना
इश्क़
किया
है
इतना
तो
जुर्माना
होगा
Vivek Vistar
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लड़खड़ा
कर
तू
गिरा
तो
क्यूँ
रहे
मायूस
ख़ुद
से
कर
परीक्षा
उन
परों
की
जो
अभी
खोले
नहीं
थे
Vivek Vistar
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लैला
के
ख़्वाब
मरे
हैं
महलों
में
लेकिन
मजनूँ
को
सड़कों
पर
पत्थर
खाना
होगा
Vivek Vistar
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भुलाकर
हर
गिला
शिकवा
मिलो
सब
यार
होली
में
जुड़ें
हर
टूटते
दिल
के
वफ़ा
के
तार
होली
में
हो
जाए
नफ़रती
हर
रंग
फीका
इन
फ़िज़ाओं
में
खिले
बस
एक
रंगत
ही
गुलाल-ए-प्यार
होली
में
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Vivek Vistar
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