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Vishakt ki Kalam se
tu hi zaroori ho gaya hai aaj kal
tu hi zaroori ho gaya hai aaj kal | तू ही ज़रूरी हो गया है आज कल
- Vishakt ki Kalam se
तू
ही
ज़रूरी
हो
गया
है
आज
कल
भोले
मुझे
अब
थाम
मेरे
साथ
चल
- Vishakt ki Kalam se
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डर
कमाना
जानता
हूँ
डर
छिपाना
जानता
हूँ
जानता
हूँ
कल
बुरा
है
पर
निभाना
जानता
हूँ
मैं
घिरा
हूँ
राख
से
पर
सब
जलाना
जानता
हूँ
जानता
हूँ
तेज़
मेरा
रोष
लाना
जानता
हूँ
आँख
से
मेरी
हवा
में
विष
मिलाना
जानता
हूँ
उड़
रहे
हैं
जो
गगन
में
बाज़
ढाना
जानता
हूँ
जानता
हूँ
बल
बढ़ाना
गिर
उड़ाना
जानता
हूँ
कौन
रोकेगा
मुझे
मैं
शव
खपाना
जानता
हूँ
जानता
हूँ
दव
बहाना
जल
जलाना
जानता
हूँ
नाम
में
विष
है
हमारे
मैं
बिसाना
जानता
हूँ
जीत
को
आदत
बनाकर
राज़
पाना
जानता
हूँ
जानता
हूँ
मैं
हक़ीक़त
मैं
फसाना
जानता
हूँ
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हवा-बाज़ी
नहीं
करते
किए
हैं
काम
काले
चलेगी
जब
हवा
मेरी
उड़ेंगे
नाम
वाले
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मुझे
आसान
लगता
था
कभी
पैसे
कमाना
मगर
पैसे
इसी
ने
नींद
गायब
कर
रखी
है
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यहाँ
भी
मैं
तिरा
दीदार
करने
की
ख़ुशी
में
मिटा
दूँगा
अभी
ये
रार
मरने
की
ख़ुशी
में
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कहानी
जानकर
मेरी
तुम्हें
क्या
हो
गया
था
मिला
तुमको
दुबारा
फिर
कहीं
जो
खो
गया
था
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