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Tiwari Jitendra
muhabbat saath hai to maut ka paighaam samjho
muhabbat saath hai to maut ka paighaam samjho | मुहब्बत साथ है तो मौत का पैग़ाम समझो
- Tiwari Jitendra
मुहब्बत
साथ
है
तो
मौत
का
पैग़ाम
समझो
अगर
जो
दिल
दिया
तो
जान
उसके
नाम
समझो
कभी
पायल
बजा
कर
दिल
की
धड़कन
को
बढ़ाएँ
अगर
समझो
कभी
होंठों
से
उसका
काम
समझो
उसे
ऐसे
न
देखो
की
ख़बर
बनकर
चले
वो
गुलाबों
की
तरह
है
पर
उसे
तुम
आम
समझो
- Tiwari Jitendra
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हम
चाहते
थे
मौत
ही
हम
को
जुदा
करे
अफ़्सोस
अपना
साथ
वहाँ
तक
नहीं
हुआ
Waseem Nadir
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मौत
ही
इंसान
की
दुश्मन
नहीं
ज़िंदगी
भी
जान
ले
कर
जाएगी
Arsh Malsiyani
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सब
ने
माना
मरने
वाला
दहशत-गर्द
और
क़ातिल
था
माँ
ने
फिर
भी
क़ब्र
पे
उस
की
राज-दुलारा
लिक्खा
था
Ahmad Salman
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देखो
मौत
का
मौसम
आने
वाला
है
ज़िंदा
रहना
सब
सेे
बड़ी
लड़ाई
है
Shadab Asghar
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दिल
को
सुकून
रूह
को
आराम
आ
गया
मौत
आ
गई
कि
दोस्त
का
पैग़ाम
आ
गया
Jigar Moradabadi
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मौत
को
हम
ने
कभी
कुछ
नहीं
समझा
मगर
आज
अपने
बच्चों
की
तरफ़
देख
के
डर
जाते
हैं
Shakeel Jamali
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जन्नत
में
आ
गया
था
किसी
अप्सरा
पे
दिल
जिसकी
सज़ा-ए-मौत
में
दुनिया
मिली
मुझे
Ankit Maurya
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ज़िंदगी
तू
ने
मुझे
क़ब्र
से
कम
दी
है
ज़मीं
पाँव
फैलाऊँ
तो
दीवार
में
सर
लगता
है
Bashir Badr
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बरस
रही
है
आँखें
हैं
ये
इनको
बादल
मत
कहना
मौत
हुई
है
दिल
की
मेरे
उसको
घाइल
मत
कहना
जीवन
भर
वो
साथ
रहेगा
प्यार
करेगा
बस
तुमको
मुझको
पागल
कह
देती
थी
उसको
पागल
मत
कहना
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Tanoj Dadhich
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बहुत
से
ग़म
समेट
कर
बनाई
एक
डायरी
चुवाव
देख
रात
भर
बनाई
एक
डायरी
ये
हर्फ़
हर्फ़
लफ़्ज़
लफ़्ज़
क़ब्र
है
वरक़
वरक़
दिल-ए-हज़ीं
से
इस
क़दर
बनाई
एक
डायरी
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Aves Sayyad
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प्यार
जिसके
क़रीब
होता
है
वो
बड़ा
बद
नसीब
होता
है
आज
कल
दौर
कुछ
नया
है
क्या
इस
में
सबका
रक़ीब
होता
है
दर्द
अपना
कहा
नहीं
जाता
प्यार
में
ग़म
तबीब
होता
है
फूल
खिलते
फ़लक
बरस
उठता
जब
कभी
वो
क़रीब
होता
है
जो
मुहब्बत
यहाँ
नहीं
करता
शख़्स
वो
भी
अजीब
होता
है
जो
'तिवारी'
समझ
नहीं
सकता
आदमी
वो
नजीब
होता
है
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Tiwari Jitendra
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उम्र
भर
के
लिए
दिल
लगाया
गया
दोस्त
कह
के
मुझे
जाँ
बताया
गया
मैं
समझता
रहा
सिर्फ़
दिल
तक
हूँ
मैं
घर
के
हर
आइने
में
सजाया
गया
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Tiwari Jitendra
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नहीं
काट
सकते
तुम्हारे
बिना
दिन
बिना
बात
के
क्यूँ
जुदाई
हुई
है
Tiwari Jitendra
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हमारे
दर्द
कम
होने
लगें
हैं
दु'आ
क्या
काम
करने
लग
गई
हैं
Tiwari Jitendra
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भला
कैसी
मुहब्बत
है
ये
दरिया
से
उसे
ही
देखते
साहिल
नहीं
थकता
Tiwari Jitendra
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