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Subhana Javed
raushni raushni se haari hai
raushni raushni se haari hai | रौशनी रौशनी से हारी है
- Subhana Javed
रौशनी
रौशनी
से
हारी
है
हर
सितारे
पे
चाँद
भारी
है
क्या
बताएँ
कि
किस
तरह
तन्हा
हमने
ये
ज़िन्दगी
गुज़ारी
है
वो
मिले
ग़ैर
की
तरह
हम
सेे
ऐसी
कैसी
ये
पर्दा-दारी
है
मुझको
रखती
है
दूर
मुझ
सेे
ही
मेरे
अंदर
जो
खाकसारी
है
दाँव
पर
आ
गई
अना
मेरी
वक़्त
सब
सेे
बड़ा
जुआरी
है
एक
मुद्दत
से
तन्हा
इस
दिल
में
बेक़रारी
ही
बेक़रारी
है
- Subhana Javed
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मैं
अपने
आप
से
टकरा
गई
हूँ
तिरे
धोके
में
धोका
खा
गई
हूँ
तुझे
पा
कर
तो
ऐसा
लग
रहा
है
ज़रूरत
से
ज़ियादा
पा
गई
हूँ
तिरी
तस्वीर
भी
छेड़े
है
मुझ
को
तिरी
तस्वीर
से
शर्मा
गई
हूँ
तिरे
दामन
में
अश्क-ए-ग़म
की
सूरत
मैं
अपने
आप
को
बरसा
गई
हूँ
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Subhana Javed
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