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Sumit Panchal
mujh ko darkaar mere jaisa kuchh
mujh ko darkaar mere jaisa kuchh | मुझ को दरकार मेरे जैसा कुछ
- Sumit Panchal
मुझ
को
दरकार
मेरे
जैसा
कुछ
मैंने
चाहा
है
यार
कैसा
कुछ
मैंने
सोचा
नहीं
था
ऐसा
कुछ
हो
गया
है
यहाँ
पे
ऐसा
कुछ
- Sumit Panchal
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तमाम
फ़र्क़
मोहब्बत
में
एक
बात
के
हैं
वो
अपनी
ज़ात
का
नईं
है
हम
उस
की
ज़ात
के
हैं
Pallav Mishra
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उस
ने
सारी
दुनिया
माँगी
मैंने
उस
को
माँगा
है
उस
के
सपने
एक
तरफ़
हैं
मेरा
सपना
एक
तरफ़
Varun Anand
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कल
रात
बहुत
ग़ौर
किया
है
सो
हम
उसकी
तय
करके
उठे
हैं
कि
तमन्ना
ना
करेंगे
इस
बार
वो
तल्ख़ी
है
की
रूठे
भी
नहीं
हम
अबके
वो
लड़ाई
है
के
झगड़ा
ना
करेंगे
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Jaun Elia
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ग़ज़ल
पूरी
न
हो
चाहे,
मग़र
इतनी
सी
ख़्वाहिश
है
मुझे
इक
शे'र
कहना
है
तेरे
रुख़्सार
की
ख़ातिर
Siddharth Saaz
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तुम
ने
स्वेटर
बुना
था
मिरे
नाम
का
मैं
भी
लाया
था
कुछ
सर्दियाँ
जंगली
Shakeel Azmi
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हुस्न
सब
को
ख़ुदा
नहीं
देता
हर
किसी
की
नज़र
नहीं
होती
Ibn E Insha
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आदतन
उसके
लिए
फूल
ख़रीदे
वरना
नहीं
मालूम
वो
इस
बार
यहाँ
है
कि
नहीं
Abbas Tabish
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अदाकार
के
कुछ
भी
बस
का
नहीं
है
मोहब्बत
है
ये
कोई
ड्रामा
नहीं
है
जिसे
तेरी
आँखें
बताती
हैं
रस्ता
वो
राही
कहीं
भी
पहुँचता
नहीं
है
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Zubair Ali Tabish
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दिल
से
साबित
करो
कि
ज़िंदा
हो
साँस
लेना
कोई
सुबूत
नहीं
Fahmi Badayuni
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ये
ऐसा
क़र्ज़
है
जो
मैं
अदा
कर
ही
नहीं
सकता
मैं
जब
तक
घर
न
लौटूँ
मेरी
माँ
सज्दे
में
रहती
है
Munawwar Rana
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अश्क
पलकों
पे
मेरी
सुहाते
नहीं
ख़ुश-मिज़ाजी
के
मौसम
भी
आते
नहीं
कह
दिया
है
ये
साक़ी
ने
भी
हम
से
अब
तुम
जो
पीते
हो
वो
हम
पिलाते
नहीं
होगा
दीवान-ए-अफ़साना
इनसे
रक़म
इक
ग़ज़ल
में
तो
क़िस्से
समाते
नहीं
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Sumit Panchal
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कोई
उसके
सिवा
नहीं
मेरा
वो
भी
लेकिन
हुआ
नहीं
मेरा
उस
की
ख़ातिर
बचा
रखा
ख़ुद
को
मैंने
ख़ुद
को
किया
नहीं
मेरा
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Sumit Panchal
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चैन
आया
नहीं
कभी
दिल
को
इज़्तिराबी
रही
वही
दिल
को
मुफ़लिसी
कम
नहीं
हुई
इस
की
दौलत
ए
इश्क़
भी
मिली
दिल
को
सब
के
आती
नहीं
समझ
लेकिन
सब
के
छूती
है
शा'इरी
दिल
को
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Sumit Panchal
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ख़ुद
को
तस्लीम
कर
लिया
शायर
बस
मुझे
शा'इरी
नहीं
आती
Sumit Panchal
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काम
आया
चराग़
होना
यूँँ
जल
उठे
ख़ैर
से
अँधेरे
में
Sumit Panchal
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