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Sumit Panchal
kya muyassar siwaye zillat hai
kya muyassar siwaye zillat hai | क्या मुयस्सर सिवाए ज़िल्लत है
- Sumit Panchal
क्या
मुयस्सर
सिवाए
ज़िल्लत
है
आँख
में
आँसुओं
की
क़िल्लत
है
- Sumit Panchal
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हम
जिसे
देखते
रहते
थे
उम्र
भर
काश
वो
इक
नज़र
देखता
हम
को
भी
Mohsin Ahmad Khan
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मेरी
नींदें
उड़ा
रक्खी
है
तुम
ने
ये
कैसे
ख़्वाब
दिखलाती
हो
जानाँ
किसी
दिन
देखना
मर
जाऊँगा
मैं
मेरी
क़स
में
बहुत
खाती
हो
जानाँ
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Subhan Asad
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ये
भी
मुमकिन
है
मियाँ
आँख
भिगोने
लग
जाऊँ
वो
कहे
कैसे
हो
तुम
और
मैं
रोने
लग
जाऊँ
ऐ
मेरी
आँख
में
ठहराए
हुए
वस्ल
के
ख़्वाब
मैं
तवातुर
से
तेरे
साथ
न
सोने
लग
जाऊँ
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Ejaz Tawakkal Khan
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मेरे
दर्द
की
वो
दवा
है
मगर
मेरा
उस
सेे
कोई
भी
रिश्ता
नहीं
मुसलसल
मिलाता
है
मुझ
सेे
नज़र
मैं
कैसे
कहूँ
वो
फ़रिश्ता
नहीं
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S M Afzal Imam
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कमाल
ये
है
मुझे
देखती
हैं
वो
आँखें
मलाल
ये
है
उन्हें
देखना
नहीं
आता
Dilawar Ali Aazar
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आँसू
हमारे
गिर
गए
उन
की
निगाह
से
इन
मोतियों
की
अब
कोई
क़ीमत
नहीं
रही
Jaleel Manikpuri
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आँख
भर
आई
किसी
से
जो
मुलाक़ात
हुई
ख़ुश्क
मौसम
था
मगर
टूट
के
बरसात
हुई
Manzar Bhopali
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हम
भी
तुमको
धोखा
दें
ये
ठीक
नहीं
आँख
के
बदले
आँख
कहाँ
तक
जायज़
है
Gaurav Singh
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आईने
आँख
में
चुभते
थे
बिस्तर
से
बदन
कतराता
था
एक
याद
बसर
करती
थी
मुझे
मैं
साँस
नहीं
ले
पाता
था
Tehzeeb Hafi
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मुँह
ज़र्द-ओ-आह-ए-सर्द
ओ
लब-ए-ख़ुश्क
ओ
चश्म-ए-तर
सच्ची
जो
दिल-लगी
है
तो
क्या
क्या
गवाह
है
Nazeer Akbarabadi
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लुत्फ़
लेने
लगे
हैं
सब
मुझ
में
क्या
नज़र
आ
गया
है
अब
मुझ
में
एक
उस
के
सिवा
हैं
सब
मेरे
एक
मेरे
सिवा
हैं
सब
मुझ
में
मैं
तो
जीने
का
शौक़
रखता
था
हौसला
पर
नहीं
है
अब
मुझ
में
दर-ब-दर
हो
गया
हूँ
मैं
जब
से
कर
गई
घर
तेरी
तलब
मुझ
में
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Sumit Panchal
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लुत्फ़
ये
वस्ल
के
हैं
सारे
लिए
हिज्र
कब
हिज्र
है
हमारे
लिए
Sumit Panchal
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इसलिए
भी
छलक
मैं
जाता
हूँ
अपने
अंदर
नहीं
समाता
हूँ
यूँँ
तो
लायक़
नहीं
ग़ज़ल
इसके
आप
कहते
हैं
तो
सुनाता
हूँ
छोड़
पाता
नहीं
हूॅं
फिर
उस
को
अपनी
आदत
में
जिस
को
लाता
हूँ
मुझ
को
शायर
न
तुम
बता
देना
मैं
तो
बस
क़ाफ़िये
मिलाता
हूँ
देखता
हूँ
तमाम
दुनिया
को
इस
का
हासिल
अमल
में
लाता
हूँ
मौत
लेने
'सुमित'
मुझे
आई
आज
जीने
से
बाज़
आता
हूँ
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Sumit Panchal
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गो
कि
हम
ने
बहुत
किया
मालूम
ज़िंदगी
का
नहीं
हुआ
मालूम
कुछ
हमारे
भी
हक़
में
पढ़
लेना
आप
को
हो
अगर
दु'आ
मालूम
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Sumit Panchal
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अच्छे
अच्छों
को
कर
दिया
पागल
तू
ने
आख़िर
ये
क्या
किया
पागल
Sumit Panchal
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