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Sumit Panchal
kaun jaane ki ro rahe the ham
kaun jaane ki ro rahe the ham | कौन जाने कि रो रहे थे हम
- Sumit Panchal
कौन
जाने
कि
रो
रहे
थे
हम
ग़र्क़
दरिया
में
हो
रहे
थे
हम
पा
रहे
थे
इक
आफ़त-ए-दिल
को
इस
तरह
ख़ुद
को
खो
रहे
थे
हम
कौन
कब
कब्र
से
उठा
लाया
चैन
से
यार
सो
रहे
थे
हम
- Sumit Panchal
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होगा
किसी
दीवार
के
साए
में
पड़ा
'मीर'
क्या
रब्त
मोहब्बत
से
उस
आराम-तलब
को
Meer Taqi Meer
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हम
अम्न
चाहते
हैं
मगर
ज़ुल्म
के
ख़िलाफ़
गर
जंग
लाज़मी
है
तो
फिर
जंग
ही
सही
Sahir Ludhianvi
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सिवाए
तालियों
के
कुछ
नहीं
मिलता
ग़ज़लगोई
फ़क़त
धंधा
सुकूँ
का
है
Neeraj Neer
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मैं
न
कहता
था
हिज्र
कुछ
भी
नहीं
ख़ुद
को
हलकान
कर
रही
थी
तुम
कितने
आराम
से
हैं
हम
दोनों
देखा
बेकार
डर
रही
थी
तुम
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Mehshar Afridi
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यूँँ
देखिए
तो
आँधी
में
बस
इक
शजर
गया
लेकिन
न
जाने
कितने
परिंदों
का
घर
गया
जैसे
ग़लत
पते
पे
चला
आए
कोई
शख़्स
सुख
ऐसे
मेरे
दर
पे
रुका
और
गुज़र
गया
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Rajesh Reddy
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एक
तख़्ती
अम्न
के
पैग़ाम
की
टांग
दीजे
ऊंचे
मीनारों
के
बीच
Aziz Nabeel
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चार
दिन
झूठी
बाहों
के
आराम
से
मेरी
बिखरी
हुई
ज़िंदगी
ठीक
है
दोस्ती
चाहे
जितनी
बुरी
हो
मगर
प्यार
के
नाम
पर
दुश्मनी
ठीक
है
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SHIV SAFAR
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एक
ही
शख़्स
नहीं
होता
सदा
दिल
का
सुकूँ
एक
करवट
पे
कभी
नींद
नहीं
आ
सकती
Rehan Mirza
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कुछ
तो
करें
कि
दिल
ये
कहीं
और
जा
लगे
कुछ
देर
के
लिए
सही
आँखों
को
चैन
हो
Afzal Ali Afzal
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मुसीबतों
में
तो
याद
करते
ही
हैं
किसी
को
ये
लोग
सारे
मगर
कभी
जो
सुकूँ
में
आए
ख़याल
मेरा
तो
लौट
आना
Hasan Raqim
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जब
पुकारा
तो
हू-ब-हू
आया
हम
न
आए
तो
हम
में
तू
आया
Sumit Panchal
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ये
क़ैफियत
है
कि
जब
मेरा
यार
आँख
में
है
गुलों
का
रंग,
फिज़ां
की
बहार
आँख
में
है
Sumit Panchal
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अच्छे
अच्छों
को
कर
दिया
पागल
तू
ने
आख़िर
ये
क्या
किया
पागल
Sumit Panchal
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गामज़न
हूँ
जुनूँ
की
राहों
पर
अपनी
दानिश-वरी
तमाम
हुई
Sumit Panchal
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जाग
कर
शब
गुज़ार
दी
हम
ने
उठ
न
पाते
जो
सो
गए
होते
Sumit Panchal
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