aur kitne gham uthaane hain ha | और कितने ग़म उठाने हैं हमें इस ज़िंदगी में

  - Shubhangi kalii
औरकितनेग़मउठानेहैंहमेंइसज़िंदगीमें
ख़ुदाधोखेपेधोखेमिलरहेंहैंदोस्तीमें
ग़ममिलेंख़ुशियाँमिलेंहदमेंमिलेंतोठीकवर्ना
कुछनहींदिखताज़रुरतसेज़ियादारौशनीमें
एकदिलथापासमेरेऔरवोभीखोगयाहै
छोड़आईहूँतुम्हारेपासशायदहड़बड़ीमें
कलमुझेतोहफ़ेमेंउसनेकाँचकेकंगनदिएथे
लगरहाथाचाँदतारेदेदिएहोंतश्तरीमें
चारदिनकीज़िंदगीहैएकदिनमरनाहैसबको
यारछोड़ोयेलड़ाईक्यारखाहैदुश्मनीमें
तुमकलीहोइससियासतसेतुम्हेंक्यालेनादेना
प्यारहोनाचाहिएबेहदतुम्हारीशा'इरीमें
  - Shubhangi kalii
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