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Shubham Vaishnav
kuchh kitaaben padh ke sher-o-shaayari karne lage hain
kuchh kitaaben padh ke sher-o-shaayari karne lage hain | कुछ किताबें पढ़ के शेर-ओ-शायरी करने लगे हैं
- Shubham Vaishnav
कुछ
किताबें
पढ़
के
शेर-ओ-शायरी
करने
लगे
हैं
अब
ये
छोटे-छोटे
बच्चे
आशिक़ी
करने
लगे
हैं
- Shubham Vaishnav
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क़ौम-ओ-मज़हब
क्या
किसी
का
और
क्या
है
रंग-ओ-नस्ल
ऐसी
बातें
छोड़
कर
बस
इल्म-ओ-फ़न
की
बात
हो
Sayan quraishi
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दवाओं
की
रसीदें
देख
ली
थीं
किताबें
इसलिए
माँगी
नहीं
हैं
Tanoj Dadhich
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किताब-ए-इश्क़
में
हर
आह
एक
आयत
है
पर
आँसुओं
को
हुरूफ़-ए-मुक़त्तिआ'त
समझ
Umair Najmi
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किताबें
खोल
कर
बैठे
हैं
लेकिन
रिवीजन
बस
तुम्हारा
हो
रहा
है
Prateek Shukla
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रदीफ़ो-क़ाफ़िया-ओ-बह'र
का
भी
इल्म
है
लाज़िम
फ़क़त
दिल
टूट
जाने
से
कोई
शाइर
नहीं
बनता
Avtar Singh Jasser
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उतारा
दिल
के
वरक़
पर
तो
कितना
पछताया
वो
इंतिसाब
जो
पहले
बस
इक
किताब
पे
था
Aanis Moin
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बस
यही
इक
हुनर
सीखना
है
मुझे
वो
मिरी
चुप्पी
कैसे
पढ़ा
करती
है
Harsh saxena
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उसने
पूछा
था
पहले
हाल
मेरा
फिर
किया
देर
तक
मलाल
मेरा
मैं
वफ़ा
को
हुनर
समझता
था
मुझपे
भारी
पड़ा
कमाल
मेरा
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Subhan Asad
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हद
से
बढ़े
जो
इल्म
तो
है
जहल
दोस्तो
सब
कुछ
जो
जानते
हैं
वो
कुछ
जानते
नहीं
Khumar Barabankvi
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ख़ुद
को
मनवाने
का
मुझको
भी
हुनर
आता
है
मैं
वो
कतरा
हूँ
समुंदर
मेरे
घर
आता
है
Waseem Barelvi
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इस
तरह
शा'इरी
का
असर
हो
गया
खुशनुमा
ज़िंदगी
का
सफ़र
हो
गया
मिल
गई
चाँद
की
रौशनी
जब
उसे
इक
नया
पौधा
पूरा
शजर
हो
गया
यार
संगीत
इतना
सरल
भी
नहीं
तान
इक
सीखते
रात
भर
हो
गया
बाद
सर्दी
यहाँ
फिर
ज़ियादा
लगी
मेरा
कंबल
इधर
से
उधर
हो
गया
चाय
मीठी
बनी
और
अच्छी
बनी
देखते
सीखते
यह
हुनर
हो
गया
मैं
उसे
फिर
कभी
चूम
लूँगा
कहीं
पास
वो
पहले
जैसे
अगर
हो
गया
दिल
नहीं
लग
रहा
है
किसी
से
'शुभम'
कैसा
था
कैसा
तेरा
जिगर
हो
गया
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Shubham Vaishnav
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ख़ुश
अगर
रहना
है
तो
फिर
मौसिकी
में
रह
के
देखो
तुम
भला
कुछ
दिन
तो
मेरी
ज़िंदगी
में
रह
के
देखो
ख़ूब-सूरत
तुम
बहुत
हो
अप्सरा
भी
तुम
लगोगी
साथ
मेरे
बैठो
मेरी
शा'इरी
में
रह
के
देखो
तुमने
कैसे
कह
दिया
ये
शहर
ही
अच्छा
नहीं
है
आओ
तुम
कुछ
दिन
यहाँ
मेरी
गली
में
रह
के
देखो
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Shubham Vaishnav
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मैं
उसे
फिर
कभी
भी
पुकारा
नहीं
ग़लतियाँ
जो
हुई
अब
दुबारा
नहीं
मैं
किताबों
भरी
ज़िंदगी
में
यहाँ
और
अब
दूसरा
भी
सहारा
नहीं
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Shubham Vaishnav
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सभी
की
नज़र
ही
उधर
है
उसे
भी
नहीं
ये
ख़बर
है
अभी
तो
मिला
है
मुझे
वो
उसी
पर
सभी
की
नज़र
है
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Shubham Vaishnav
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हमारी
ग़ज़ल
बहर
में
है
हवा
की
चली
लहर
में
है
किसी
ने
हमें
ये
ख़बर
दी
यहीं
वो
इसी
शहर
में
है
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Shubham Vaishnav
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