शम्अ-ए-दिल आज कुछ बुझी सी है

  - Shoaib Ali khan
शम्अ-ए-दिलआजकुछबुझीसीहै
मेरीहिम्मतज़राथकीसीहै
आजक्यूँँतेरीयादआईहै
क्यूँँमिरीनींदफिरउड़ीसीहै
वस्लतोहाथहीनहींआता
येजुदाईमिरीसखीसीहै
शहरमेंमेरादिलनहींलगता
गाँवसेमुझकोआशिक़ीसीहै
येमहककिसतरफ़सेआईहै
येमहकउसहसीनकीसीहै
जिसकेचेहरेकीबातकरताहूँ
भीड़मेंवोझलकदिखीसीहै
क़ैसभीमरगयाथालैलाभी
येकहानीसुनीसुनीसीहै
मौतकीतोमुझेख़बरहीनहीं
ज़ीस्तग़ालिबकिशा'इरीसीहै
मेरीहालतसेतूनहींवाक़िफ़
मेरीहालतफ़क़ीरकीसीहै
यार'शोएब'तूयक़ीनकर
उसकीचाहततोदिल-लगीसीहै
  - Shoaib Ali khan
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