mauj-e-shadaan men ghamon ki tishnagi kaise rahe | मौज-ए-शादाँ में ग़मों की तिश्नगी कैसे रहे

  - SHIV SAFAR
मौज-ए-शादाँमेंग़मोंकीतिश्नगीकैसेरहे
यानीख़ुश-कामीकीज़दमेंशा'इरीकैसेरहे
तुमतोमुझ
मेंरहकहींलोगेइनआँखोंकेसिवा
परकहींभीमेरीआँखोंकीनमीकैसेरहे
देखमैंभीहूँसुख़न-वरऔरतूभीइसलिए
अपनेजैसोंकीकिसीसेदोस्तीकैसेरहे
हमभलेइकदूजेसेरहलेंजुदाहोकरमगर
ज़िंदगीसेग़मग़मोंसेज़िंदगीकैसेरहे
साँसलेनाशे'रकहनासबतोमुमकिनहैमगर
टूटनेकेबाददिलज़िंदाकोईकैसेरहे
आशिक़ीसेदूर'आशिक़रहलेंडरसेबापके
दूरलेकिनआशिक़ोंसेआशिक़ीकैसेरहे
जबतलकहैंक़ैदतेरेशौक़-ए-दीद-ए-हुस्नमें
तेरेदीवानोंकोमरज़-ए-मयकशीकैसेरहे
आगपानीकीतरहहैराब्ताइन
में‘सफ़र’
एकहीसीनेमेंउलफ़तऔरख़ुशीकैसेरहे
  - SHIV SAFAR
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