jab rozi roti kapda aur makaan gaya | जब रोजी रोटी कपड़ा और मकान गया

  - SHIV SAFAR
जबरोजीरोटीकपड़ाऔरमकानगया
क्याइश्क़कीफ़ितरतहोतीहैमैंजानगया
मैंसत्यअहिंसाकेरस्तेपरनिकलाथा
पहलेतोआँखेंफिरज़बानफिरकानगया
बाक़ीक़ब्रोंकीमुझसेेशिक़ायतजाएज़थी
मरनेकेबादभीदेरसेक्यूँँॅंशमशानगया
उसझुमकेवालीकाजबमैंनेनामसुना
ख़ुदग्राहककैसेबिकतेहैंयेजानगया
बसबीसरुपएथीक़ीमतउसकेझुमकेकी
बिकतेहैं'आशिक़सस्तेमेंमैंमानगया
  - SHIV SAFAR
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