har raat ik charaaghh jalana pada mujhe | हर रात इक चराग़ जलाना पड़ा मुझे

  - shaan manral
हररातइकचराग़जलानापड़ामुझे
येरस्मए-इंतिज़ारनिभानापड़ामुझे
आईलौटकेतूमिरीजानइसलिए
हरसुब्हइकचराग़बुझानापड़ामुझे
तूमेराहालदेखकेरोदेतीइसलिए
हँसहँसकेअपनाहालछुपानापड़ामुझे
इकअर्सेसेक़फ़समेंपरिंदाजोक़ैदथा
उसकोभीइंक़लाबसिखानापड़ामुझे
तुझसेवोएकबारमुझेइश्क़क्याहुआ
ता-उम्रफिरतोअश्कबहानापड़ामुझे
  - shaan manral
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