vo darein kyun hi bikharte rishton se | वो डरें क्यूँँ ही बिखरते रिश्तों से

  - Shams Amiruddin
वोडरेंक्यूँँहीबिखरतेरिश्तोंसे
रब्तहैजिनकोमिरीनमआँखोंसे
इकलड़ीमोतीसीठहरीगालोंपे
अश्कबनजबख़ूनटपकाआँखोंसे
यूँँतोयेमौसमनहींपतझड़केअब
फिरभीपत्तेझड़तेहैंइनशाख़ोंसे
कुछतोमजबूरीरहीहोगीतभी
तोड़आएसारेबंधनअपनोंसे
राजथाजिनकामुहब्बतपरकभी
जीरहेहैंग़ममेंवोभीसदियोंसे
थामुक़द्दरमेंसमुंदरसाराही
परगुज़ाराकररहेकुछक़तरोंसे
  - Shams Amiruddin
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy