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Shajar Abbas
zindagi roz das rahi hai mujhe
zindagi roz das rahi hai mujhe | ज़िंदगी रोज़ डस रही है मुझे
- Shajar Abbas
ज़िंदगी
रोज़
डस
रही
है
मुझे
एक
ज़हरीले
साँप
के
मानिंद
- Shajar Abbas
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मुक़र्रर
दिन
नहीं
तो
लम्हा-ए-इमकान
में
आओ
अगर
तुम
मिल
नहीं
सकती
तो
मेरे
ध्यान
में
आओ
बला
की
ख़ूब-सूरत
लग
रही
हो
आज
तो
जानाँ
मुझे
इक
बात
कहनी
थी
तुम्हारे
कान
में..
आओ
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Darpan
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मेरे
होंठों
के
सब्र
से
पूछो
उसके
हाथों
से
गाल
तक
का
सफ़र
Mehshar Afridi
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अब
उसकी
शादी
का
क़िस्सा
न
छेड़ो
बस
इतना
कह
दो
कैसी
लग
रही
थी
Zubair Ali Tabish
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वो
आँखें
चुप
थीं
लेकिन
हँस
रही
थीं
मेरा
जी
कर
रहा
था
चूम
लूँ
अब
Ritesh Rajwada
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प्यार
करने
की
हिम्मत
नहीं
उनके
पास
और
हम
सेे
किनारा
भी
होता
नहीं
बात
सीधे
कही
भी
नहीं
जा
रही
और
कोई
इशारा
भी
होता
नहीं
उसको
उम्मीद
है
ऐश
होगी
बसर
साथ
में
जब
रहेगी
मिरे
वो
मगर
मुझपे
जितनी
मुहब्बत
बची
है
सखी
इतने
में
तो
गुज़ारा
भी
होता
नहीं
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Divyansh "Dard" Akbarabadi
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जिस
मौसम
में
भीगना
है
हम
दोनों
को
उस
मौसम
में
पूछ
रही
हो
छाता
है
Zubair Alam
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सफ़र
पीछे
की
जानिब
है
क़दम
आगे
है
मेरा
मैं
बूढ़ा
होता
जाता
हूँ
जवाँ
होने
की
ख़ातिर
Zafar Iqbal
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मेरा
बटुआ
नहीं
होता
है
ख़ाली
तेरी
तस्वीर
की
बरकत
रही
माँ
Satya Prakash Soni
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मैं
सोचता
हूँ
जब
कभी
आओगी
सामने
किस
मुँह
से
कह
सकूँगा
मोहब्बत
नहीं
रही
Shoonya
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इश्क़
अगर
बढ़ता
है
तो
फिर
झगड़े
भी
तो
बढ़ते
हैं
आमदनी
जब
बढ़ती
है
तो
ख़र्चे
भी
तो
बढ़ते
हैं
माना
मंज़िल
नहीं
मिली
है
हमको
लेकिन
रोज़ाना
एक
क़दम
उसकी
जानिब
हम
आगे
भी
तो
बढ़ते
हैं
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Tanoj Dadhich
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लिबास-ए-सुर्ख़
करो
ज़ेब-ए-तन
मता-ए-जाँ
लिबास-ए-सुर्ख़
में
तुम
इक
गुलाब
लगती
हो
Shajar Abbas
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यार
कितना
हसीन
मंज़र
था
मेरा
शाना
था
और
तेरा
सर
था
हम
महज़
अच्छे
दोस्त
थे
दोनों
सबको
लगता
था
हम
में
चक्कर
था
क़ैस
ये
कह
रहा
है
लैला
से
संग
रेज़ी
मेरा
मुकद्दर
था
दिल
से
आवाज़
आ
रही
है
'शजर'
बिन
मोहब्बत
किए
ही
बेहतर
था
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Shajar Abbas
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हम
अपने
हाल-ए-शिकस्ता
को
ले
के
सहरा
में
जनाब-ए-क़ैस
की
सुन्नत
निभाने
आए
हैं
Shajar Abbas
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हमारे
हाल
को
देखा
तो
कह
उठा
ये
तबीब
किसी
चुड़ैल
की
तुमको
नज़र
लगी
हुई
है
Shajar Abbas
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महक
रहा
है
यूँँ
कमरा
हमारा
ख़ुश्बू
से
रखी
हुई
हैं
किताबों
में
चिट्ठियाँ
उसकी
Shajar Abbas
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