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Shajar Abbas
vo meri god men sar rakh ke boli
vo meri god men sar rakh ke boli | वो मेरी गोद में सर रख के बोली
- Shajar Abbas
वो
मेरी
गोद
में
सर
रख
के
बोली
'शजर'
ज़ैदी
मेरी
ज़ुल्फें
सँवारों
- Shajar Abbas
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इक
मुहब्बत
से
भरी
उस
ज़िंदगी
के
ख़्वाब
हैं
पेड़
दरिया
और
पंछी
तेरे
मेरे
ख़्वाब
हैं
Neeraj Nainkwal
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इसी
से
जान
गया
मैं
कि
बख़्त
ढलने
लगे
मैं
थक
के
छाँव
में
बैठा
तो
पेड़
चलने
लगे
मैं
दे
रहा
था
सहारे
तो
इक
हुजूम
में
था
जो
गिर
पड़ा
तो
सभी
रास्ता
बदलने
लगे
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Farhat Abbas Shah
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तुमको
फ़िराक-ए-यार
ने
मिस्मार
कर
दिया
मुझको
फ़िराक-ए-यार
ने
फ़नकार
कर
दिया
गुल
से
मुतालिबा
जो
किया
बोसे
का
शजर
गुल
ने
हिला
के
पत्तियाँ
इनकार
कर
दिया
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Shajar Abbas
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हम
लोग
चूंकि
दश्त
के
पाले
हुए
हैं
सो
ख़्वाबों
में
चाहे
झील
हों,
आँखों
में
पेड़
हैं
Siddharth Saaz
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सब
परिंदों
से
प्यार
लूँगा
मैं
पेड़
का
रूप
धार
लूँगा
मैं
तू
निशाने
पे
आ
भी
जाए
अगर
कौन
सा
तीर
मार
लूँगा
मैं
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Tehzeeb Hafi
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ये
सोच
के
माँ
बाप
की
ख़िदमत
में
लगा
हूँ
इस
पेड़
का
साया
मिरे
बच्चों
को
मिलेगा
Munawwar Rana
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हमारा
इश्क़
इबादत
का
अगला
दर्जा
है
ख़ुदा
ने
छोड़
दिया
तो
तुम्हारा
नाम
लिया
ग़मों
से
बैर
था
सो
हमने
ख़ुद-कुशी
कर
ली
शजर
ने
गिर
के
परिंदों
से
इन्तेक़ाम
लिया
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Balmohan Pandey
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जिसे
तुम
काट
आए
उस
शजर
को
ढूँढता
होगा
परिंदा
लौटकर
के
अपने
घर
को
ढूँढता
होगा
Bhaskar Shukla
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इस
रास्ते
में
जब
कोई
साया
न
पाएगा
ये
आख़िरी
दरख़्त
बहुत
याद
आएगा
Azhar Inayati
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उड़
गए
सारे
परिंदे
मौसमों
की
चाह
में
इंतिज़ार
उन
का
मगर
बूढे
शजर
करते
रहे
Ambreen Haseeb Ambar
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गुलशन-ए-क़ल्ब
में
गुलाब
थी
वो
मेरी
दुनिया
का
माहताब
थी
वो
नाम
की
तरह
हू-ब-हू
अपने
ख़ूब-सूरत
हाँ
बे
हिसाब
थी
वो
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Shajar Abbas
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शम्स
पर
कोहरे
की
थोड़ी
गर्द
है
धूप
है
मद्धम
सी
मौसम
सर्द
है
शाख़
पर
ये
कैफ़ियत
है
फूल
की
जिस्म
में
लर्ज़ा
है
चेहरा
ज़र्द
है
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Shajar Abbas
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जब
ग़ज़ल
में
गुमान
लिखता
हूँ
तब
तुझे
अपनी
जान
लिखता
हूँ
लिख
के
महताब
तेरे
चेहरे
को
जिस्म
को
आसमान
लिखता
हूँ
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Shajar Abbas
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ज़माना
हो
गया
महताब
देखे
आँखों
से
ख़ुदा
के
वास्ते
तस्वीर
भेज
दो
अपनी
Shajar Abbas
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हम
उनको
भूल
जाएँगे
हक़ीक़त
है
यक़ीं
मानो
यक़ीं
मानो
हक़ीक़त
है
हम
उनको
भूल
जाएँगे
Shajar Abbas
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