मुसीबतोंमेंमददगारक्यूँनहींबनते
हक़ीक़तोंकेपरस्तारक्यूँनहींबनते
बरसरहेहैंमुसलसलजोचश्म-ए-गर्दूंसे
येआँसूमिस्ल-ए-शरर-बारक्यूँनहींबनते
बनातेफिरतेहोदुनियाकोसाहिब-ए-किरदार
वोआपसाहिब-ए-किरदारक्यूँनहींबनते
सितमगरोंकेमुक़ाबिलयेदौर-ए-हाज़िरमें
जवानआहनीदीवारक्यूँनहींबनते
सवालकरतीहैतारीख़-ए-मिस्ररोज़'शजर'
बताओरौनक़-ए-बाज़ारक्यूँनहींबनते