zabt ko doston aazmaate raho | ज़ब्त को दोस्तों आज़माते रहो

  - Shajar Abbas
ज़ब्तकोदोस्तोंआज़मातेरहो
ज़ख़्मखातेरहोमुस्कुरातेरहो
दर्ददिलकासभीकोसुनातेरहो
हिज्रकाउम्रभरग़ममनातेरहो
जोहैवा'दावोवा'दानिभातेरहो
यादकरतेरहोयादआतेरहो
इल्मकीरौशनीसेयेसाराजहाँ
जगमगातेरहोजगमगातेरहो
हक़मेंमज़लूमकेतुमसदाबोलना
अपनीऔलादकोयेसिखातेरहो
दिलकेकूचेमेंमतहोनेदोतीरगी
इश्क़कीशम्अदिलमेंजलातेरहो
इश्क़केबिनमुकम्मलनहींज़िंदगी
मिसरामेरीग़ज़लकायेगातेरहो
आँखेंवीरानहैंदिलपरेशानहै
ख़्वाबबनकेइनआँखोंमेंआतेरहो
ग़ज़लेंलिखतेरहोतुममेरेहुस्नपर
मेरीतस्वीरकोतुमबनातेरहो
ख़ुश-नुमाहोरहाहैयेमौसमसुनो
ज़ुल्फ़-ए-पुर-ख़मकोयूँँहीउड़ातेरहो
जिसपेआएसमरइश्क़काप्यारका
वोशजरतुमजहाँमेंलगातेरहो
  - Shajar Abbas
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