ye sochkar mita diya qalb-e-niyaaz ko | ये सोचकर मिटा दिया क़ल्ब-ए-नियाज़ को

  - Shajar Abbas
येसोचकरमिटादियाक़ल्ब-ए-नियाज़को
कबतकअदामैंकरताहुदूदेजवाज़को
सरख़मतोकीजिएज़राआग़ोश-ए-इश्क़में
हाथोंसेहमसँवारेंगेज़ुल्फ़-ए-दराज़को
होनेदेंगेदुनियामेंतज़्लील-ए-जान-ए-जाँ
करलेंगेदफ़्नक़ल्बमेंफुर्क़तकेराज़को
येकौनहक़मेंमेरेमुसल्लेपेएहल-ए-सुब्ह
महव-ए-दुआख़ुदासहैउम्र-ए-दराज़को
रखकरदहनपेमेरेदहनमेरेसनम
दस्त-ए-शिफ़ादोआपमरीज़-ए-अयाज़को
हैदस्तबस्ताआपसेयेइल्तिजामेरी
लिल्लाहख़त्मकीजिएरस्म-ए-मजाज़को
क़ल्ब-ए-हज़ीयेकरताहैहसरतमता-ए-जाँ
पल्लूपेमैंअदाकरूँँतेरेनमाज़को
अश'आरवैसेमुझकोअताकरदेकिबरिया
अश'आरतूनेजैसेदिएथेफ़राज़को
ख़ून-ए-जिगरसेसीनेपेकिर्तासकेगिला
तहरीरकरकेभेजदियाइश्क़बाज़को
बे-वफ़ातूदेखलेयेकेअबतलक
रक्खाहैराज़मैंनेसदातेरेराज़को
जबकश्तीदरमियान-ए-भँवरगईमेरी
दिलनेसदालगाईशजरकारसाज़को
  - Shajar Abbas
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