tum par hue jo zulm-o-sitam hazrat-e-farhaad | तुम पर हुए जो ज़ुल्म-ओ-सितम हज़रत-ए-फ़रहाद

  - Shajar Abbas
तुमपरहुएजोज़ुल्म-ओ-सितमहज़रत-ए-फ़रहाद
उनकोभूलपाएँगेहमहज़रत-ए-फ़रहाद
जोग़मउठाएआपनेइसराह-ए-इश्क़में
हमभीउठारहेहैंवोग़महज़रत-ए-फ़रहाद
कूचाकूचापरचम-ए-इश्क़-ओ-वफ़ालिए
तबलीग़-ए-इश्क़करतेहैंहमहज़रत-ए-फ़रहाद
परचमउठाकेइश्क़काकहतेहैंनौजवाँ
झुकनेदेंगेहमयेअलमहज़रत-ए-फ़रहाद
जातेथेजैसेआपउसीशानसेशजर
जातेहैंदेखोकू-ए-सनमहज़रत-ए-फ़रहाद
  - Shajar Abbas
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