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Shajar Abbas
rasm-e-aalam badal rahe hain ham
rasm-e-aalam badal rahe hain ham | रस्म-ए-आलम बदल रहे हैं हम
- Shajar Abbas
रस्म-ए-आलम
बदल
रहे
हैं
हम
इसलिए
सब
को
खल
रहे
हैं
हम
आतिश-ए-इश्क़
में
ये
दिल
बोला
इक
ज़माने
से
जल
रहे
हैं
हम
आन
कर
तेरे
मन
की
बातों
में
आज
तक
हाथ
मल
रहे
हैं
हम
मिस्ल-ए-मूसा
ये
देख
ले
आलम
बहते
पानी
पे
चल
रहे
हैं
हम
सज
रहे
हैं
तमाम
कूचे
सुनो
अपने
घर
से
निकल
रहे
हैं
हम
- Shajar Abbas
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न
उसने
हाथ
लगाया
न
उसने
बातें
कीं
पड़े
पड़े
यूँँ
ही
ख़ुद
में
ख़राब
हो
गए
हम
Abhishek shukla
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बात
ऐसी
भी
भला
आप
में
क्या
रक्खी
है
इक
दिवाने
ने
ज़मीं
सर
पे
उठा
रक्खी
है
इत्तिफ़ाक़न
कहीं
मिल
जाए
तो
कहना
उस
सेे
तेरे
शाइर
ने
बड़ी
धूम
मचा
रक्खी
है
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Ismail Raaz
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यूँं
तो
हर
शाम
उमीदों
में
गुज़र
जाती
है
आज
कुछ
बात
है
जो
शाम
पे
रोना
आया
Shakeel Badayuni
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हम
हार
गए
तुम
जीत
गए
हम
ने
खोया
तुम
ने
पाया
इन
छोटी
छोटी
बातों
का
हम
कोई
ख़याल
नहीं
करते
Wali Aasi
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प्यार
मुहब्बत
बाद
की
बातें
जान
कभी
ये
सोचा
है
किसने
तेरा
साथ
दिया
था
कौन
नशे
में
ख़त्म
हुआ
Vikram Gaur Vairagi
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तुम्हारे
पास
आते
हैं
तो
साँसें
भीग
जाती
हैं
मोहब्बत
इतनी
मिलती
है
कि
आँखें
भीग
जाती
हैं
तबस्सुम
इत्र
जैसा
है
हँसी
बरसात
जैसी
है
वो
जब
भी
बात
करती
है
तो
बातें
भीग
जाती
हैं
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Aalok Shrivastav
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तिरे
बग़ैर
भी
हम
जी
रहे
हैं
और
ख़ुश
हैं
ये
बात
कम
तो
नहीं
है
तुझे
जलाने
को
Imran Aami
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बात
करते
हुए
बे-ख़याली
में
ज़ुल्फ़ें
खुली
छोड़
दी
हम
निहत्थों
पे
उसने
ये
कैसी
बलाएँ
खुली
छोड़
दी
साथ
जब
तक
रहे
एक
लम्हे
को
भी
रब्त
टूटा
नहीं
उसने
आँखें
अगर
बंद
कर
ली
तो
बाँहें
खुले
छोड़
दी
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Khurram Afaq
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तमाम
बातें
जो
चाहता
था
मैं
तुम
सेे
कहना
वो
एक
काग़ज़
पे
लिख
के
काग़ज़
जला
दिया
है
Dipendra Singh 'Raaz'
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होंटों
पर
इक
बार
सजा
कर
अपने
होंट
उस
के
बाद
न
बातें
करना
सो
जाना
Ateeq Allahabadi
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चौदह
बरस
की
उम्र
में
ये
इश्क़
का
मरज़
यानी
तुम्हारा
हाल
कुछ
अच्छा
नहीं
हैं
दोस्त
Shajar Abbas
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ख़ानदानी
हूँ
सो
ग़द्दारी
नहीं
कर
सकता
मैं
मोहब्बत
में
अदाकारी
नहीं
कर
सकता
इश्क़
रग
रग
में
मेरे
जिस्म
की
बहता
है
शजर
जिस्म
से
दूर
ये
बीमारी
नहीं
कर
सकता
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Shajar Abbas
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सफ़र
के
वक़्त
वो
मुझको
सवार
करते
हुए
लरज़ते
होंठों
से
बोली
'शजर'
ख़ुदा
हाफ़िज़
Shajar Abbas
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मुझे
ख़बर
है
मिरे
बाद
तुझको
ये
दुनिया
हक़ीर
समझेगी
हर
गाम
पर
सज़ा
देगी
Shajar Abbas
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रब
से
फ़रियाद
करके
रोऊगी
तुम
मुझे
याद
करके
रोऊगी
हंँस
के
बर्बाद
कर
रही
हो
मुझे
मुझको
बर्बाद
करके
रोऊगी
आपकी
क़ैद
में
परिंद
है
जो
उसको
आज़ाद
करके
रोऊगी
तुम
हिरस
में
मेरी
सुनो
पागल
ख़ुद
को
सय्याद
करके
रोऊगी
बिन
शजर
के
ये
जान
लो
जाना
बस्ती
आबाद
करके
रोऊगी
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Shajar Abbas
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