qasam KHuda ki rag-e-jaan se bhi qareeb ho tum | क़सम ख़ुदा की रग-ए-जाँ से भी क़रीब हो तुम

  - Shajar Abbas
क़समख़ुदाकीरग-ए-जाँसेभीक़रीबहोतुम
मेरेहबीबथेअबभीमेरेहबीबहोतुम
हमारेहालपेअहल-ए-नज़रयेकहनेलगे
बहुतहीग़म-ज़दामज़लूमहोग़रीबहोतुम
हैफ़र्ज़तुमपेदवाढूँढोदर्द-ए-दिलकीकोई
ख़ुदाकेबंदेहोमुर्शीदसुनोतबीबहोतुम
मुझेगलेसेलगाकरयेकहकेआगेबढ़ा
बुरामाननावाइज़बड़ेअजीबहोतुम
ग़ज़लमेंनज़्ममेंतहरीरहुस्न-ए-जानकरो
अगरजोमीरसेग़ालिबशजरअदीबहोतुम
  - Shajar Abbas
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