khaar gulshan men gulaabon se alag rakhta hooñ | ख़ार गुलशन में गुलाबों से अलग रखता हूँ

  - Shajar Abbas
ख़ारगुलशनमेंगुलाबोंसेअलगरखताहूँ
अपनीआँखोंकोमैंख़्वाबोंसेअलगरखताहूँ
गुलबनाताहूँवफ़ालिखताहूँक़िर्तासपेमैं
रंज-ओ-ग़मदर्दकिताबोंसेअलगरखताहूँ
इसलिएइश्क़केमारोंसेनहींबनतीमेरी
ख़ुदकोमैंख़ाना-ख़राबोंसेअलगरखताहूँ
मैंमुअर्रिख़हूँनएदौरकाइससोचकेसाथ
हिज्रकोइश्क़केबाबोंसेअलगरखताहूँ
अपनीबाहोंसेनिकलनेनहींदेताहूँ'शजर'
उसकोदुनियाकेअज़ाबोंसेअलगरखताहूँ
  - Shajar Abbas
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