kahkashaan shams aur qamar hi nahin | कहकशाँ शम्स और क़मर ही नहीं

  - Shajar Abbas
कहकशाँशम्सऔरक़मरहीनहीं
यूँँफ़लकपरमिरीनज़रहीनहीं
किसलिएजाएँयारकू-ए-सनम
जबवहाँकोईमुंतज़रहीनहीं
मजलिस-ए-हिज्रहोचुकीहैबपा
दिलकेअंदरहमेंख़बरहीनहीं
ख़ाकसहराकीछाननेदोमुझे
मैंकहाँजाऊँमेराघरहीनहीं
दिलमेंबरछीसीगरउतरसके
येनज़रफिरनज़रनज़रहीनहीं
ज़िंदगीसेमैंथककेबैठगया
मौतकादिलमेंयूँँतोडरहीनहीं
बाद-ए-फ़ुर्क़तयक़ीनकरतूमिरा
दिलमेंअबख़्वाहिश-ए-सफ़रहीनहीं
शेर-ए-हैदरसेजंगकौनकरे
लश्कर-ए-शाममेंतोनरहीनहीं
कैसेपरवाज़आसमाँमेंकरें
जिस्महैजिस्मपरतोपरहीनहीं
ज़िंदगीमेंअगरमगरहैमगर
मौतआएअगरमगरहीनहीं
साथचलताहैमेरेअक्समिरा
क्यूँकहूँकोईहमसफ़रहीनहीं
देखपाएँवोजिससेेज़ख़्म-ए-जिगर
उनकीआँखोंमेंवोनज़रहीनहीं
क्यूँमैंदस्तारकामलालकरूँँ
जबमिरेतनपेबाक़ीसरहीनहीं
ख़ाकमेंमिलचुकाहैजिस्ममिरा
आपहैंआपकोख़बरहीनहीं
क्यूँकरेगाशजरकीक़द्रकोई
जबशजरपरकहींसमरहीनहीं
  - Shajar Abbas
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