jo KHvaab dekha hai maine vo KHvaab likkhoonga | जो ख़्वाब देखा है मैंने वो ख़्वाब लिक्खूँगा

  - Shajar Abbas
जोख़्वाबदेखाहैमैंनेवोख़्वाबलिक्खूँगा
मैंउसकीआँखोंलबोंपरकिताबलिक्खूँगा
लबोंकोतितलियाँलिक्खूँगाजुगनूआँखोंको
औरउसकेचेहरेकोमैंमाहताबलिक्खूँगा
फिरउसकिताबकेअंदरसुनो'शजर'ज़ैदी
मैंउसकेलहजेकीशीरीपेबाबलिक्खूँगा
मरीज़-ए-इश्क़जोहैंलाइलाजउनकेलिए
तुम्हारीआँखोंकोमैंफ़ैज़याबलिक्खूँगा
मैंउसकेचेहरा-ए-अनवरकोबाख़ुदामुर्शिद
कभीक़मरतोकभीआफ़ताबलिक्खूँगा
अगरवोपूछेगीख़तमेंकेचायकैसीलगी
उसेजवाबमेंमैंला-जवाबलिक्खूँगा
फ़रीज़ाअपनीमोहब्बतकायूँँनिभाऊँगा
ग़ज़लमेंउसकोसदाबाहिजाबलिक्खूँगा
अज़ाबमुझपेजोनाज़िलहुएहैंहिज्रकेबाद
मैंख़तमेंउसकोवोसारेअज़ाबलिक्खूँगा
हज़ारोंबाबमोहब्बतकेहैंकिताबोंमें
मैंअबकिताबोंमेंफ़ुर्क़तपेबाबलिक्खूँगा
क़लमउठाऊँगाजबभीमैंज़िन्दगीमेंशजर
मता-ए-जानकाहुस्न-ओ-शबाबलिक्खूँगा
  - Shajar Abbas
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