jaanib-e-koo-e-butaan naqsh-e-qadam badhne lage | जानिब-ए-कू-ए-बुताँ नक़्श-ए-क़दम बढ़ने लगे

  - Shajar Abbas
जानिब-ए-कू-ए-बुताँनक़्श-ए-क़दमबढ़नेलगे
क़ल्ब-ए-मुज़्तरकोलगासू-ए-हरमबढ़नेलगे
बाग़बाँगुलशन-ए-हस्तीपेहैयेवक़्त-ए-ज़वाल
फूलपरख़ारोंकेअबज़ुल्म-ओ-सितमबढ़नेलगे
हुस्न-ए-यूसुफ़सर-ए-बाज़ारज़ुलेख़ाआया
लेकेसबनुक़रा-ओ-दीनार-ओ-दिरमबढ़नेलगे
परचम-ए-इश्क़लिएदस्त-ए-मुबारकमेंजवाँ
जानिब-ए-दश्त-ओ-दमनमेरेसनमबढ़नेलगे
क़ल्ब-ए-सालिममेंशजरशौक़-ए-शहादतलेकर
मक़तल-ए-इश्क़कीसूदेखिएहमबढ़नेलगे
  - Shajar Abbas
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy