gham-e-firaq men vo aise ghazamzada hogaa | ग़म-ए-फ़िराक़ में वो ऐसे ग़म-ज़दा होगा

  - Shajar Abbas
ग़म-ए-फ़िराक़मेंवोऐसेग़म-ज़दाहोगा
कभीवोरूखकोकभीसरकोपीटताहोगा
भलाकरेगाकिसीकातेराभलाहोगा
बुराकरेगाअगरतूतेराबुराहोगा
मुझेयक़ीनहैंअपनीहसीनआँखोंमें
हरएकशबवोमेरेख़्वाबदेखताहोगा
लबउसकेतितलियाँकसरतसेचूमतीहोंगी
वोमेरानामअगरमुँहसेबोलताहोगा
मैंजैसेसोचतारहताहूँउसकेबारेमें
वोमेरेबारेमेंऐसाहीसोचताहोगा
सुकून-ए-क़ल्बकीख़ातिरवोहिज्रकामारा
दीयाबुझाकेअँधेरेमेंबैठताहोगा
सुलगताहोगागुलिस्ताँमेंक़ल्बख़ारोंका
जबकेभँवराकोईगुलकोचूमताहोगा
मरीज़-ए-इश्क़कीख़ातिरभटककेसहरामें
दवावोमर्ज़कीबरसोंसेढूंढताहोगा
लिबास-ए-ख़ाककिएज़ेब-ए-तनवोसदियोंसे
अभीभीदश्त-ए-जुनूँमेंहाँरोरहाहोगा
मेरेशजरकाबताक्याकोईख़तआयाहै
वोरस्तारोककेक़ासिदसेपूछताहोगा
हमेंयक़ींहैंयेगुलशनमेंफूलकेलबपे
हमारानामशजरदेखनासजाहोगा
  - Shajar Abbas
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