bastii sukhun kii aise hai bas meer ke baghair | बस्ती सुख़न की ऐसे है बस मीर के बग़ैर

  - Shajar Abbas
बस्तीसुख़नकीऐसेहैबसमीरकेबग़ैर
बेकारजैसेआँखेंहैंतनवीरकेबग़ैर
देखाहैमैंनेशाख़पेमुरझाएफूलको
बेचैनदिलहैख़्वाबकीता'बीरकेबग़ैर
भरजाएदिलतोइश्क़कापहलाउसूलहै
तर्क-ए-तअल्लुक़ातहोताख़ीरकेबग़ैर
आवाज़रहीहैयेसहरासेक़ैसकी
राँझानहींजिएगाकभीहीरकेबग़ैर
तेरेलिएतबीबअजबहैमगरहैसच
ज़ख़्मीजिगरकियागयाशमशीरकेबग़ैर
  - Shajar Abbas
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