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Shadab khan
muhabbat men khasaare ho rahe hain
muhabbat men khasaare ho rahe hain | मुहब्बत में ख़सारे हो रहे हैं
- Shadab khan
मुहब्बत
में
ख़सारे
हो
रहे
हैं
चुनाँचे
हम
तुम्हारे
हो
रहे
हैं
सुना
था
इश्क़
में
होता
है
ऐसा
मेरे
भी
अब
जगारे
हो
रहे
हैं
दुपट्टे
से
ज़रा
ढक
लो
ये
चेहरा
परेशाँ
सब
सितारे
हो
रहे
हैं
फ़क़त
तेरी
कमी
है
ज़िन्दगी
में
वगरना
काम
सारे
हो
रहे
हैं
जिन्हें
नफ़रत
थी
मेरे
नाम
से
भी
वही
सब
अब
हमारे
हो
रहे
हैं
- Shadab khan
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छोड़कर
तन्हा
मुझे
जन्नत
में
रहने
लग
गए
हो
और
मैंने
ज़िन्दगीं
कर
ली
जहन्नम
शा'इरी
में
"Nadeem khan' Kaavish"
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मैं
रोज़
रात
यही
सोच
कर
तो
सोता
हूँ
कि
कल
से
वक़्त
निकालूँगा
ज़िन्दगी
के
लिए
Swapnil Tiwari
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बहन
ने
बाँध
कर
राखी
बचा
ली
ज़िंदगी
वर्ना
ज़रा
सा
वक़्त
बाक़ी
था
हमारी
नब्ज़
थमने
में
Harsh saxena
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तूने
देखी
है
वो
पेशानी
वो
रुख़्सार
वो
होंठ
ज़िंदगी
जिनके
तसव्वुर
में
लुटा
दी
हमने
तुझपे
उठी
हैं
वो
खोई
हुई
साहिर
आँखें
तुझको
मालूम
है
क्यूँ
उम्र
गंवा
दी
हमने
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Faiz Ahmad Faiz
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मौत
का
भी
इलाज
हो
शायद
ज़िंदगी
का
कोई
इलाज
नहीं
Firaq Gorakhpuri
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दूसरी
कोई
लड़की
ज़िंदगी
में
आएगी
कितनी
देर
लगती
है
उस
को
भूल
जाने
में
Bashir Badr
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उसके
जाने
और
आने
में
फ़क़त
यह
फ़र्क़
है
दूर
जाती
मौत
है
तो
पास
आती
ज़िन्दगी
Divy Kamaldhwaj
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मुख़्तसर
होते
हुए
भी
ज़िन्दगी
बढ़
जाएगी
माँ
की
आँखें
चूम
लीजे
रौशनी
बढ़
जाएगी
Munawwar Rana
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मौत
ही
इंसान
की
दुश्मन
नहीं
ज़िंदगी
भी
जान
ले
कर
जाएगी
Arsh Malsiyani
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आस्था
का
रंग
आ
जाए
अगर
माहौल
में
एक
राखी
ज़िंदगी
का
रुख़
बदल
सकती
है
आज
Unknown
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जिसके
साथ
थोड़ा
भी
लगाव
किया
उसके
होंठ
पर
गहरा
सा
घाव
किया
Shadab khan
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वो
बिछड़ने
पे
भी
दिखाई
दे
इश्क़
ऐसी
नहीं
रिहाई
दे
छू
ले
गर
वो
मैं
ठीक
हो
जाऊँ
जाने
क्यूँ
हफ्तों
तक
दवाई
दे
घंटों
ख़ामोश
फोन
पर
हो
तुम
बात
क्लियर
मुझे
सुनाई
दे
ज़ख़्म
की
देख
भाल
क्यूँ
हो
अब
इक
भरे
दूसरा
दुहाई
दे
कौन
देता
ग़रीब
को
इज़्ज़त
तू
अमीरों
को
ही
बधाई
दे
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Shadab khan
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दिल
उसको
देके
ये
इल्म
हुआ
हमको
मिलती
है
कैसे
मरने
की
वजह
हमको
Shadab khan
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मैं
इनकार
कर
तो
दूँ
उसकी
मुहब्बत
मगर
यार
वो
रोता
भी
तो
बहुत
है
Shadab khan
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ये
और
बात
है
तू
खाता
रहा
क़सम
अफ़सोस
अब
भरोसा
लेकिन
नहीं
रहा
Shadab khan
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