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Shadab Shabbiri
KHuda hi hai ki jo seena sipar pahaadon ke
KHuda hi hai ki jo seena sipar pahaadon ke | ख़ुदा ही है, कि जो सीना सिपर पहाड़ों के
- Shadab Shabbiri
ख़ुदा
ही
है,
कि
जो
सीना
सिपर
पहाड़ों
के
जिगर
को
चीर
के
दरिया
निकाल
देता
है
- Shadab Shabbiri
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जिस
ने
इस
दौर
के
इंसान
किए
हैं
पैदा
वही
मेरा
भी
ख़ुदा
हो
मुझे
मंज़ूर
नहीं
Hafeez Jalandhari
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हमेशा
साथ
सबके
तो
ख़ुदा
भी
रह
नहीं
सकता
बनाकर
औरतें
उसने
ज़मीं
को
यूँँ
किया
जन्नत
Anukriti 'Tabassum'
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कश्तियाँ
सब
की
किनारे
पे
पहुँच
जाती
हैं
नाख़ुदा
जिन
का
नहीं
उन
का
ख़ुदा
होता
है
Ameer Minai
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जीने
का
बस
एक
यही
ढब
अच्छा
है
मेरा
तेरा
सबका
ही
रब
अच्छा
है
बंदा
हो
तो
यार
हमारे
जैसा
हो
सब
कुछ
खोकर
भी
बोले,
सब
अच्छा
है
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Tanoj Dadhich
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कितनी
सराहत
से
ख़ुदा
ने
की
तिरी
कारीगरी
शफ़्फ़ाफ़
शीशे
को
तराशा,
हूर
का
पैकर
दिया
Aditya Pandey
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के
'हैलो'
सुनते
ही
कट
कर
दिया
है
उसने
मेरा
फ़ोन
ख़ुदा
का
शुक्र
है
आवाज़
तो
पहचानता
है
वो
Zubair Ali Tabish
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माँ
बाप
और
उस्ताद
सब
हैं
ख़ुदा
की
रहमत
है
रोक-टोक
उन
की
हक़
में
तुम्हारे
नेमत
Altaf Hussain Hali
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तेरी
ख़ातिर
ख़ुदास
हम
दु'आ
करते
नहीं
करते
भला
हम
और
क्या
करते
Arohi Tripathi
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ख़ुदा
की
शा'इरी
होती
है
औरत
जिसे
पैरों
तले
रौंदा
गया
है
तुम्हें
दिल
के
चले
जाने
पे
क्या
ग़म
तुम्हारा
कौन
सा
अपना
गया
है
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Ali Zaryoun
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मैं
हूँ
सदियों
से
भटकता
हुआ
प्यासा
दरिया
ऐ
ख़ुदा
कुछ
तो
समुंदर
के
सिवा
दे
मुझ
को
Afzal Ali Afzal
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मौसम
यही,
यही
था
महीना,
इसी
जगह
डूबा
था
मेरे
दिल
का
सफ़ीना
इसी
जगह
Shadab Shabbiri
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ग़ुर्बत
का
ऐलान
करोगे
अपना
ही
नुक़सान
करोगे
ख़ुद
खोए
खोए
रहते
हो
मेरा
क्या
तुम
ध्यान
करोगे
बुरा
भला
तुम
मुझको
कह
कर
काम
मिरा
आसान
करोगे
फ़र्ज़
अदा
ही
करोगे
अपना
मुझ
पर
क्या
एहसान
करोगे
कन्याओं
के
दुश्मन
हो
तुम
तुम
क्या
कन्यादान
करोगे
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Shadab Shabbiri
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मन्ज़र
कोई
नहीं
है
नहीं
रंग-ओ-बू
मगर
शादाब
मेरा
नाम
है
अफ़सोस
कीजिए
Shadab Shabbiri
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किसी
का
रिन्द
मयख़ाना
किसी
का
किसी
की
आँख
पैमाना
किसी
का
किसी
की
जान
ले
लेगा
किसी
दिन
किसी
से
यूँँ
ही
शरमाना
किसी
का
किसी
की
ज़िन्दगी
बर्बाद
कर
दी
किसी
से
रूठ
कर
जाना
किसी
का
किसी
को
दे
गया
सहरा
नवर्दी
किसी
से
दूर
हो
जाना
किसी
का
किसी
के
साथ
जीने
की
तलब
में
किसी
पर
यूँँ
ही
मर
जाना
किसी
का
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Shadab Shabbiri
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तुम
वाह
तो
करते
हो
मगर
तंज़
मिला
कर
हम
आह
भी
करते
हैं
तो
इक
ख़ास
तरह
से
Shadab Shabbiri
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