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Shadab Shabbiri
is chaman ko sabhi ne seencha hai
is chaman ko sabhi ne seencha hai | इस चमन को सभी ने सींचा है
- Shadab Shabbiri
इस
चमन
को
सभी
ने
सींचा
है
उम्र
गुज़री
इसी
वज़ाहत
में
- Shadab Shabbiri
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अगरचे
इश्क़
में
मजनू
बड़े
बदनाम
होते
हैं
अगरचे
क़ैस
जैसे
आशिक़ों
के
नाम
होते
हैं
भटक
सकती
नहीं
जंगल
में
लैला
चाह
करके
भी
अजी
लैला
को
घर
में
दूसरे
भी
काम
होते
हैं
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Gagan Bajad 'Aafat'
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मत
पूछो
कितना
ग़मगीं
हूँ
गंगा
जी
और
जमुना
जी
ज़्यादा
तुमको
याद
नहीं
हूँ
गंगा
जी
और
जमुना
जी
अमरोहे
में
बान
नदी
के
पास
जो
लड़का
रहता
था
अब
वो
कहाँ
है
मैं
तो
वहीं
हूँ
गंगा
जी
और
जमुना
जी
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Jaun Elia
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गुलाब
टहनी
से
टूटा
ज़मीन
पर
न
गिरा
करिश्में
तेज़
हवा
के
समझ
से
बाहर
हैं
Shahryar
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जलाने
वाले
जलाते
ही
हैं
चराग़
आख़िर
ये
क्या
कहा
कि
हवा
तेज़
है
ज़माने
की
Jameel Mazhari
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मैंने
चाहा
भी
कि
फिर
इस
संग-दिल
पे
फूल
उगे
पर
तुम्हारी
रुख़्सती
के
बाद
ये
होता
नहीं
Siddharth Saaz
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रो
रहा
था
गोद
में
अम्माँ
की
इक
तिफ़्ल-ए-हसीं
इस
तरह
पलकों
पे
आँसू
हो
रहे
थे
बे-क़रार
जैसे
दीवाली
की
शब
हल्की
हवा
के
सामने
गाँव
की
नीची
मुंडेरों
पर
चराग़ों
की
क़तार
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Ehsan Danish
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अपनी
क़िस्मत
में
सभी
कुछ
था
मगर
फूल
ना
थे
तुम
अगर
फूल
ना
होते
तो
हमारे
होते
Ashfaq Nasir
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बहरस
ख़ारिज
हूँ
ये
मालूम
है
पर
तुम्हारी
ही
ग़ज़ल
का
शे'र
हूँ
Gyan Prakash Akul
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मिरे
सूरज
आ!
मिरे
जिस्म
पे
अपना
साया
कर
बड़ी
तेज़
हवा
है
सर्दी
आज
ग़ज़ब
की
है
Shahryar
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दिन
ढल
गया
और
रात
गुज़रने
की
आस
में
सूरज
नदी
में
डूब
गया,
हम
गिलास
में
Rahat Indori
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बर्क़
दिल
पर
मिरे
गिराएगा
करके
वा'दा
वो
फिर
न
आएगा
Shadab Shabbiri
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किसी
को
न
शिकवा
शिकायत
रहे
सभी
को
सभी
से
मोहब्बत
रहे
तिरंगे
के
नीचे
रहें
अम्न
से
ख़ुदाया
तिरंगा
सलामत
रहे
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Shadab Shabbiri
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किसी
का
रिन्द
मयख़ाना
किसी
का
किसी
की
आँख
पैमाना
किसी
का
किसी
की
जान
ले
लेगा
किसी
दिन
किसी
से
यूँँ
ही
शरमाना
किसी
का
किसी
की
ज़िन्दगी
बर्बाद
कर
दी
किसी
से
रूठ
कर
जाना
किसी
का
किसी
को
दे
गया
सहरा
नवर्दी
किसी
से
दूर
हो
जाना
किसी
का
किसी
के
साथ
जीने
की
तलब
में
किसी
पर
यूँँ
ही
मर
जाना
किसी
का
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Shadab Shabbiri
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बराए
नाम
ही
शादाब
हूँ
मैं
मिरा
अपना
कोई
मंज़र
नहीं
है
Shadab Shabbiri
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इश्क़
को
कार-ए-दिल्लगी
समझा
या
ख़ुदा
हम
ये
क्या
समझ
बैठे
Shadab Shabbiri
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