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Savan
dil gham-o-ranj ka bhara meraa
dil gham-o-ranj ka bhara meraa | दिल ग़म-ओ-रंज का भरा मेरा
- Savan
दिल
ग़म-ओ-रंज
का
भरा
मेरा
एक
ये
ही
मिरी
रफ़ाक़त
है
- Savan
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क्या
अब
तलक
वो
एक
आस
बाक़ी
है
इस
दर्द
का
कोई
मिरास
बाक़ी
है
गुल
हो
चुके
हैं
सब
चराग़
अब
मेरे
अब
भी
कहीं
कोई
उजास
बाक़ी
है
वो
जा
चुके
जो
दिल
मिरा
दुखाते
थे
अब
कौन
मेरा
इख़तिसास
बाक़ी
है
सच
है
कि
सुब्ह-ओ-शाम
बात
करते
हैं
पर
बात
जो
है
एक
ख़ास
बाक़ी
है
इसके
परे
तो
है
सहर
नई
'सावन'
बस
एक
ये
ही
तो
अमास
बाक़ी
है
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क्या
अब
तलक
वो
एक
आस
बाक़ी
है
इस
दर्द
का
कोई
मिरास
बाक़ी
है
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उसे
भूलूॅं
मैं
किस
तरह
कि
भूलूॅं
उसको
भूलना
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अब
भी
तिरा
वो
रूठ
जाना
याद
है
वो
हर
शिकायत
हर
बहाना
याद
है
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अब
भी
तिरा
वो
रूठ
जाना
याद
है
वो
हर
शिकायत
हर
बहाना
याद
है
तेरे
लिए
तो
आम
था
खोना
मुझे
अब
तक
मुझे
तुझ
को
भुलाना
याद
है
यूँँॅं
पास
आना
दूर
जाना
ख़्वाब
में
हर
रात
तेरा
ख़्वाब
आना
याद
है
मुझ
से
अगर
हो
जानना
तो
पूछ
लो
मुझको
वफ़ा
का
हर
फ़साना
याद
है
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