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Satyawesh Niraj
saath rah kar door rehta hai koi
saath rah kar door rehta hai koi | साथ रह कर दूर रहता है कोई
- Satyawesh Niraj
साथ
रह
कर
दूर
रहता
है
कोई
इसलिए
मजबूर
रहता
है
कोई
आइने
को
देख
मुझको
ये
लगा
क्यूँ
यहाँ
मग़रूर
रहता
है
कोई
- Satyawesh Niraj
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जाने
अब
वो
किसके
साथ
निकलता
होगा
रातों
को
जाने
कौन
लगाता
होगा
दो
घंटे
तैयारी
में
Danish Naqvi
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पता
करो
कि
मेरे
साथ
कौन
उतरा
था
ज़मीं
पे
कोई
अकेला
नहीं
उतरता
है
Ahmad Abdullah
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मिले
किसी
से
गिरे
जिस
भी
जाल
पर
मेरे
दोस्त
मैं
उसको
छोड़
चुका
उसके
हाल
पर
मेरे
दोस्त
ज़मीं
पे
सबका
मुक़द्दर
तो
मेरे
जैसा
नहीं
किसी
के
साथ
तो
होगा
वो
कॉल
पर
मेरे
दोस्त
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Ali Zaryoun
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एक
काटा
राम
ने
सीता
के
साथ
दूसरा
वनवास
मेरे
नाम
पर
Nasir Shahzad
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वो
रातें
चाँद
के
साथ
गईं
वो
बातें
चाँद
के
साथ
गईं
अब
सुख
के
सपने
क्या
देखें
जब
दुख
का
सूरज
सर
पर
हो
Ibn E Insha
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आप
के
बाद
हर
घड़ी
हम
ने
आप
के
साथ
ही
गुज़ारी
है
Gulzar
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मैं
जिस
के
साथ
कई
दिन
गुज़ार
आया
हूँ
वो
मेरे
साथ
बसर
रात
क्यूँँ
नहीं
करता
Tehzeeb Hafi
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रात
दिन
तेरे
साथ
कटते
थे
यार
अब
तुझ
सेे
बात
से
भी
गए
ये
मोहब्बत
भी
किन
दिनों
में
हुई
दिल
मिलाने
थे
हाथ
से
भी
गए
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Kafeel Rana
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अब
साथ
नहीं
है
भी
तो
शिकवा
नहीं
'अख़्तर'
एहसान
भी
मुझ
पर
मिरे
भाई
के
बहुत
थे
Majeed Akhtar
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गर
डूबना
ही
अपना
मुक़द्दर
है
तो
सुनो
डूबेंगे
हम
ज़रूर
मगर
नाख़ुदा
के
साथ
Kaifi Azmi
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दिल
की
दुनिया
में
कोई
आग
लगाने
आया
एक
जंगल
हुई
बस्ती
को
जलाने
आया
एक
कमज़र्फ़
को
भेजा
था
दुआएँ
देकर
एक
कमज़र्फ़
मुझे
फिर
से
सताने
आया
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Satyawesh Niraj
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मैं
तुमको
याद
करता
हूँ
अब
इस
में
'था'
लगा
दें
तो
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Satyawesh Niraj
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चोट
मुझ
सेे
पूछती
है
है
दवा
या
दर्द
ही
है
आनी
है
तो
मौत
आए
ये
भी
तो
चारागरी
है
है
समझ
तो
दर्द
समझे
वो
भी
आख़िर
आदमी
है
मैं
अकेला
ठीक
ही
हूँ
ये
भी
तो
इक
ज़िन्दगी
है
बाँटना
ग़म
सोचकर
तुम
बाँटने
से
लौटती
है
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Satyawesh Niraj
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आख़िरश
को
नींद
प्यारी
हो
गई
आख़िरश
हम
मौत
तक
भी
आ
गए
Satyawesh Niraj
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किसी
के
घर
बसाने
से
गया
कोई
ठिकाने
से
तू
मुझ
सेे
प्यार
करती
थी
ये
कह
देना
'फलाने'
से
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Satyawesh Niraj
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