sab kuchh sambhav hai | "सब कुछ संभव है"

  - Satyam kumar singh
"सबकुछसंभवहै"
होसकताहैइनरातकेअँधेरोंमेंमुझेउनसवालोंके
जबाबमिलजाए
जोदिनकेउजालोंमेंमैंनेख़ुदसेपूछेहैं
होसकताहैमैंसबसेेलड़केजीतजाऊँऔरख़ुदसेहीहारजाऊँ
होसकताहैकिमैंकिसीरातसोऊँऔरवोरातमेरीआख़रीहो
होसकताहैकिमेंउसजंगमेंभीहारजाऊँ
जोहररातमेंख़ुदसेलड़ताहूँ
यायेभीहोसकताहैकी
आजरातफिरआपमेरेस्वप्नमेंवापिसजाओ
जैसेअक्सरआयाकरतीहो
जानतीहोप्रियसबकुछसंभवहै
हाँहमारावापिससेएकहोजानाभी
  - Satyam kumar singh
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