"1947 की तक़सीम और इंसाँ"

  - Sanjay Bhat
"1947कीतक़सीमऔरइंसाँ"
इंसाँकुछयहाँसेनिकलेवहाँसेकुछआए
एकदूजेसेमिलेलेकिनसरहदकेसाए
इंसाँकाटेइंसाँकोऔरकोहराममचाए
कुछज़ख़्मीकुछमरगएकिसकोकौनबचाए
कुछज़िंदाकुछमुर्दाराहमेंगिरतेजाए
जिस्महीजिस्महैंरूहकहींनज़रपाए
कौनकिसेअबदेखेसँभालेसमझाए
होशहीगुमहैहोशकहाँसेअबलाए
ख़ूनसेधरतीमाँसुर्ख़अबहोतीजाए
रोतेहैंबच्चेकईमाँकहाँहैहाए
ज़र्दसेचेहरेउजड़ीहवाएँनज़रकोभाए
ताज़ाकोईहवाबसइससरहदकोमिटाए
  - Sanjay Bhat
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