usii raste se guzre aur parkein ham nishaan apna | उसी रस्ते से गुज़रें और परखें हम निशाँ अपना

  - Sanjay Bhat
उसीरस्तेसेगुज़रेंऔरपरखेंहमनिशाँअपना
चलोदेखेंहैअबभीक्याकिसीलबपरबयाँअपना
चलाहूँअर्शछूनेदेखकेपरवाज़पंछीकी
येमानाजिस्मबे-दमहैयूँँदिलतोहैजवाँअपना
जिसेदिलसेबनायाथाबड़ेअरमानसेहमने
हमारारास्तातकताहैक्याअबभीमकाँअपना
वोकहतेहोजिसेतुमदश्तइकवीरानसाकोई
कभीथावोतोफूलोंसेभरासाराजहाँअपना
हैंहमहीहमतोदुनियामेंनहींहैऔरतोकोई
जानेकैसेटूटेगाअनाकायेगुमाँअपना
फ़रिश्तोंइसचमनकोतुमसँवारोअपनेहाथोंसे
नहींहैरंगफूलोंमेंकोईबाग़बाँअपना
  - Sanjay Bhat
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