gham-e-hasti hai kya teraa hi gham hai | ग़म-ए-हस्ती है क्या तेरा ही ग़म है

  - Sanjay Bhat
ग़म-ए-हस्तीहैक्यातेराहीग़महै
तेरीउम्मीदमेंहस्तीभीनमहै
सिलाकुछतोमिलेवहशतकामेरी
किसीवहशीकातूभीतोसनमहै
ढलीहैज़िंदगीदेतेसदाएँ
सोचाथातूइतनीपुर-सितमहै
थकाहूँढूँडतेख़्वाबोंमेंतुझको
मुक़ाबिलहोनेकाकिसपलकरमहै
हैंदिलकशलोगयूँँतोसैंकड़ोंपर
कशिशकातेरीतोदिलपरसितमहै
ख़ुदासुनलेकरूँँमैंअर्ज़तुझसे
तवक़्क़ोतुझसेहैबसतेरादमहै
सुख़नकामेरेहैयूँँरब्ततुझसे
हिमायतसेतेरीचलतीक़लमहै
  - Sanjay Bhat
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