aakhir kyun hai | आख़िर क्यूँँं है

  - Chandrapal singh nishad
आख़िरक्यूँँंहै
अभीतोवक़्तयेकड़कधूपकाहै
फिरयेसूरजइतनालालक्यूँँंहै
येतोशहरकासबसेेरईसआदमीहैनयेइसतरहकंगालक्यूँँंहै
येहाथमेंतुमक्याछुपारहीहो
उंगलीपरयेअँगूठीकानिशानक्यूँँंहै
येचिड़ियांउड़क्यूँँंनहींपारहीं
इनकेपैरोंमेंलगीयेलगामक्यूँँंहै
क्याकहातुमनेमैंमररहाहूँ
फिरमुझेबचानेकाइतनातामझामक्यूँँंहै
  - Chandrapal singh nishad
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