ek jyoti | "एक ज्योति"

  - Salman Yusuf
"एकज्योति"
ज़िंदगीमुश्किलोंकासफ़रहैजहाँ
नीमतारीकरातेंहैं
औरख़ारहैं
चहारजानिबदजलकीवबाआमहै
इश्क़उल्फ़ततअ'ल्लुक़भी
व्यापारहै
लोगअपनेहोकरभीअपनेनहीं
अपनेचेहरोंपेझूठीहँसी
लेकेदुनियाकोगुमराह
करनेसेहरगिज़नहींथकरहे
मेरेज़ख़्मोंकेपकनेकेहैमुल्तमिस
यारज़ख़्मोंपेमरहमनहींरखरहे
महव-ए-हैरतहूँदुनियाकेचलनेपेमैं
रोज़सूरजकेउगनेऔरढलनेपेमैं
तीरगीआमहैरातबदनामहै
हाँउफ़क़परमगरएकदियाजलरहाहै
जिसकीकिरणोंसेराहोंमेंभटकेहुए
राहगीरोंकोराहकापताचलरहाहै
उसकीज्योतिसेरौशननहींआसमाँ
उसकीकिरणोंसेउठतानहींयेजहाँ
परअँधेरेकीआँखोंकोएकज्योतिसे
फूटतीरौशनीगड़ेजारहीहै
वोअकेलीहैलेकिन
दर्दतकलीफ़मअज़ूरमजबूर
मुश्किलनामुम्किनसेहरदिनलड़ेजारहीहै
उसकीहिम्मतकोहैरतभरीदाद
साराउफ़क़देरहाहै
उसकालड़नामुझेआपको
ज़िंदगीकासबक़देरहाहै
  - Salman Yusuf
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