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Sachin Sharma
jab se maa ke li.e she'r kehne laga
jab se maa ke li.e she'r kehne laga | जब से माँ के लिए शे'र कहने लगा
- Sachin Sharma
जब
से
माँ
के
लिए
शे'र
कहने
लगा
तब
से
उस्ताद
मेरे
मुनव्वर
हुए
- Sachin Sharma
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नाम
आया
है
तेरा
जब
से
गुनहगारों
में
सब
गवाह
अपनी
गवाही
से
मुकरना
चाहें
Swapnil Tiwari
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मुझे
ख़ुश
करने
की
कोई
नई
तरकीब
ढूँढो
अब
यूँँ
उसका
ज़िक्र
हर
इक
बात
पर
अच्छा
नहीं
यारों
Harsh saxena
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तंग
आ
चुके
हैं
कशमकश-ए-ज़िंदगी
से
हम
ठुकरा
न
दें
जहाँ
को
कहीं
बे-दिली
से
हम
Sahir Ludhianvi
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मैं
हो
गया
हूँ
क़ैद
हज़ारों
रिवाज़
में
मुझको
मेरी
ही
ज़ात
ने
फलने
नहीं
दिया
shaan manral
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हम
तो
क्यूँँकर
कहें
कि
बोसा
दो
गर
इनायत
करो
इनायत
है
Hakeem Dehlvi
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भूलती
कब
हैं
भला
पिछली
रुतों
की
सोहबतें
हंस
बैठा
ही
रहा
सूखे
हुए
तालाब
पर
Adeem Hashmi
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बाग़-ए-बहिश्त
से
मुझे
हुक्म-ए-सफ़र
दिया
था
क्यूँँ
कार-ए-जहाँ
दराज़
है
अब
मिरा
इंतिज़ार
कर
Allama Iqbal
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आसमाँ
से
गरज
छेड़ती
है
हमें
एक
बारिश
में
भी
भीगे
थे
साथ
हम
Parul Singh "Noor"
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बर्बाद
कर
दिया
हमें
परदेस
ने
मगर
माँ
सब
से
कह
रही
है
कि
बेटा
मज़े
में
है
Munawwar Rana
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ऐसा
लगता
है
कि
तन्हाई
मुझे
छूती
है
उँगलियाँ
कौन
फिरोता
है
मेरे
बालों
में
Ashok Mizaj Badr
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बिछड़
कर
फिर
वहीं
मिलना
कभी
आसाँ
नहीं
होता
मुहब्बत
का
नया
रस्ता
कभी
आसाँ
नहीं
होता
तू
ग़ालिब
मीर
मोमिन
का
पुजारी
है
मगर
सुन
ले
ग़ज़ल
की
राह
पे
चलना
कभी
आसाँ
नहीं
होता
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Sachin Sharma
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लोग
जलते
हैं
सब,
इस
'सचिन'
से
बहुत
दूसरा
नाम
अब
रखने
वाला
हूँ
मैं
Sachin Sharma
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बहुत
उड़ते
थे
अब
ठहरने
लगे
हैं
परिंदों
के
पर
हम
कतरने
लगे
हैं
जो
सुनते
नहीं
अपने
आगे
किसी
की
ग़लत
सबको
साबित
ये
करने
लगे
हैं
कि
इतनी
भी
अच्छी
नहीं
है
दलाली
नज़र
से
हमारी
उतरने
लगे
हैं
क़सम
दे
के
कहते
मुझे
मत
बताना
जो
हो
सामना
तो
मुकरने
लगे
हैं
मिरे
शे'र
सुन
कर
जले
जा
रहे
हैं
वो
महफ़िल
से
देखो
गुज़रने
लगे
बहुत
बोले
हम
तो
मुकद
में
चले
हैं
तो
जाना
'सचिन'
क्यूँँ
सुधरने
लगे
हैं
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Sachin Sharma
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कुछ
हरकतें
करती
हैं
नादानी
से
आप
कह
देती
हैं
हर
बात
आसानी
से
आप
ये
क्या
कि
सीढ़ी
पे
अचानक
रोकना
बाँहों
में
क्यूँँ
भरती
हैं
शैतानी
से
आप
पहली
दफ़ा
चूमा
तो
अंदाज़ा
हुआ
लगते
हैं
हमको
सच
में
बिरयानी
से
आप
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Sachin Sharma
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बचपने
की
मुहब्बत-मुहब्बत
सी
थी
बाद
इसके
हवस-कारी
हो
जाती
है
Sachin Sharma
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