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Vr Hardik Jaiswal
Hain kaii ehsaan fir is baar main kyuun karze mein huun
हैं कई एहसान फिर इस बार मैं क्यूँँ कर्ज़े में हूँ
- Vr Hardik Jaiswal
हैं
कई
एहसान
फिर
इस
बार
मैं
क्यूँँ
कर्ज़े
में
हूँ
आप
से
इतना
लिया
है
प्यार
मैं
क्यूँँ
कर्ज़े
में
हूँ
ख़्वाब
भी
गुल
भी
मददगारी
ये
दिल
जान-ए-जहाँ
भी
सब
तो
हैं
इस
जेब
में
फिर
यार
मैं
क्यूँँ
कर्ज़े
में
हूँ
- Vr Hardik Jaiswal
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अरे
हम
हैं
हमें
कह
दें
जो
भी
सब
आपके
ग़म
हैं
यही
कुछ
ख़ास
दर्दों
के
हमारे
पास
मरहम
हैं
नहीं
है
क्या
कोई
अब
आपका
हम-ग़म
अरे
हम
हैं
अगर
है
सिर्फ़
तन्हाई
तो
क्या
ग़म
है
अरे
हम
हैं
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देखो
उनकी
महफ़िल
का
ये
हिसाब
कैसा
है
क्या
बताएँ
हम
उनका
अब
रुआब
कैसा
है
कैसे
हैं
वो
ये
चर्चा
तो
जनाब
है
ऐसा
काँटों
को
न
पूछो
बस
अब
गुलाब
कैसा
है
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चलिए
आज
आपका
हुनर
पता
लगाते
हैं
हँसिए
सब्र
आपका
तो
आज
आज़माते
हैं
हार
जाएँगे
गले
तो
ऐसे
हम
लगाते
हैं
आ
के
लगिए
वहम
आपका
अभी
मिटाते
हैं
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मानव
बना
दिया
कि
कोई
शाप
लिख
दिया
संसार
भर
का
ज़ुल्म
बिना
माप
लिख
दिया
लिखकर
जो
थक
गया
वो
तो
खाकर
तरस
ज़रा
उसने
मेरे
नसीब
में
माँ-बाप
लिख
दिया
सुख-दुख
में
रह
न
जाए
कोई
ग़म
कोई
कमी
भाई-बहन
का
साथ
वो
भी
आप
लिख
दिया
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तो
क्या
अब
मैं
करूँँ
जो
वर्ष
सब
यूँँ
ही
गुज़ारा
है
मिले
काँधे
कि
सारे
यार
का
यूँँ
ही
सहारा
है
अरे
बेशर्म
आवारा
यही
सुनकर
गुज़ारा
है
तो
चलता
हूँ
कि
मेरे
यारों
ने
यूँँ
ही
पुकारा
है
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